डरहार लूटकांड :थाना में दर्ज कांड और अनुसंधान में विरोधाभास ,पांच नकाबपोस थे या कहानी कुछ और ??अनुसंधान में लगी हे बहादुरपुर थाने की पुलिस।

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा 

बहादुरपुर थाना क्षेत्र के डरहार गांव में 9जुलाई की शाम हुई लूट कांड में पुलिस के अनुसंधान और दर्ज प्राथमिकी में कोई तालमेल नहीं हे ,जिसे लेकर संदेह की स्थिति बनी हुई हे ?

इस मामले के अनुसंधानकर्ता मनीषा कुमारी एक एक बिंदुओं को बारीकी से खंगाल रही हे लेकिन अनुसंधान अलग रास्ते पर जाते दिखाई दें रही हे ,जबकि  स्थानीय लोंगों का दबाव थाना पुलिस पर हे ,कहा जा रहा हे कि काले रंग के ड्रेस में आयें पांच अपराधियों को पुलिस पकड़ने में असफल हो रही हे।प्राथमिकी के अनुसार पवन कुमार मिश्रा के घर में 9जुलाई 26की संध्या 7बजे के करीब लूट हुई हे,उस वक्त पुतोहु करिश्मा घर में थी और भांजा प्रशांत कुमार प्रियम छत पर था।इस मामले में बहादुरपुर थाना में करिश्मा के बयान पर विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी 208/26 दर्ज हे,जिसमें सोने चांदी और नगदी लूट की बात कही गई हे।

यहा एक बात तो साफ हे कि डरहार जैसे गांव में काले रंग का पांच नकाबपोस अगर गांव में घुस जाएं तो शायद ही वह नकाबपोस उस गांव से बचकर भाग पाएगा,संभव ही नहीं हे ।  अगर लूट की घटना हे तो गांव के एक भी लोंगों ने उस नकाबपोस और काले रंग में अपराधियों को देखा तक नहीं ?क्या यह संभव हे ,क्यूंकि शाम के सात बजे ही घटना का जिक्र हे ?सवाल यही हे कि डरहार जैसे गांव में भरी आबादी के बीच शाम सात बजे लूट की वारदात हुई और आगे -पीछे  दायें -बाएं किसी एक भी व्यक्तियों ने अपराधियों को देखा तक नहीं ?

भरी आबादी के बीच शाम 7बजे लूट की घटना को अंजाम देना क्या संभव हे ,कहीं ऐसा तो नहीं कि बगल के लोंगों ने यानि घर से सटे लोंगों ने ही वारदात को अंजाम दे दिया हो और अपने घर के बिल में छुप गया हो ?यह अनुसंधान का विषय हो सकता हे।ऐसा लग रहा हे कि किसी बगलगीर ने घटना को अंजाम दें दिया हो ?कहीं जमीन संबंधी विवाद तो नहीं हे।करिश्मा के पति /ससुर उतने पैसे वाले भी नहीं हे ,इनसे ज्यादा पैसे वालों का घर वहां कई लोंगों का हे ,फिर उस घर में यह वारदात क्यूँ नहीं ?

यही नहीं इस कथित आपराधिक घटना का पूरे घटनाक्रम की गवाह एक मात्र आवेदिका यानी करिश्मा ही हे ,घटना के बाबत वह पूरी जानकारी सिर्फ भांजे को देती हे और भांजा इस बाबत सभी से कहते फिर रहा हे कि वह छत पर था ,और मामी ने पूरे घटना क्रम की जानकारी उसे दी हे ,उसने भी घटनाक्रम को देखा नहीं हे ,पुलिस के अनुसंधान में भी यही बात सामने आयी हे ?स्थानीय कुछ लोग नाम नहीं छपने के शर्त पर बताया कि इस घर मे दो मंजिला पर आने के लिये कोई रास्ता नहीं हे अगर रास्ता हे तो सिर्फ बगल के घर से कूदकर /चढ़कर आ सकता हे।

वहीं दूसरा संदेह यहां उठता हे कि करिश्मा का कहना हे कि एक छोटे से चाकू के नोक पर अपराधियों ने उसे बंधक बनाते हुये उसके बाल को पकड़ा था और गमछा से उसका मुंह बांध दिया था ,सोने चांदी के सामान लूटने के बाद चाकू से उसका बाल काट दिया ?और अपराधी मुख्य गेट से भाग गये।यहां यह संदेह हे कि किसी छोटे चाकू से क्या सिर का बाल कट सकता हे ,चाकू कितना भी धारदार हो,चाकू से बाल काटने पर  माथे के बाल से दो चार पीस काटते हुये फिसल जाएगा , दो चार बाल कट सकता हे जबकि अच्छा खासा बाल कटा हुआ घर में पुलिस को, वह भी एक जगह मिला हे ॥

मान ले कि बाल काट दिया तो वह एक जगह नहीं वह अलग अलग जगहों पर बिखरा मिलेगा किसी एक जगह समेटकर रखा हुआ नहीं मिलेगा ,बात यही खत्म नहीं होती हे अगर लुटेरा सारे सामान को लूट लेगा फिर दो मोबाईल को गेट पर छोड़कर क्यूँ भागेगा ,वह भी साथ में लेकर जाएगा ,इसके अलावे कुछ चांदी का सामान फेंका मिला, कई बातें हे जो प्राथमिकी को सपोर्ट नहीं करते। करिश्मा का आरोप यह भी हे कि दो लोग घर में पूरे काले कपड़े और ग्लोव्स लगाकर घुसे थे और तीन लोग बाद में घुसे और उसे पकड़कर गमछे से मुंह बांध दिया और उसके घर का गहना पैसा लेकर भाग गया ,में चिल्लायी तो भांजा छत से नीचे आया और में सब बात उससे बतायी ?

यही नहीं इस घटना को बताते हुये वह  बेहोश हो गई , घर वालों ने उसे डीएमसीएच के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराने का प्रयास किया ,बताया जाता हे कि बड़ी मशक्कत के बाद सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया जहां के चिकित्सकों ने बताया कि इतना हल्ला गुल्ला किया गया जिस कारण भर्ती लेना पड़ा लेकिन कोई दिक्कत नहीं था ,ना ही शरीर में कोई जख्म था ना ही सुई के निशान ?ऐसे में बहादुरपुर थाना की पुलिस पेशों पेश में हे ?बहादुरपुर थानाध्यक्ष प्रसुन्जय कुमार ने कहा कि प्राथमिकी में लूटपाट की घटना के बाबत जांच की जा रही हे ,उन्होंने कहा कि प्राथमिकी में दर्ज एक एक बिंदुओं पर जांच जारी हे।