औद्योगिक क्षेत्र के लिए 385 एकड़ भूमि अधिग्रहण का किसानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी, हनुमाननगर के सिनुआरा में नौ गांवों के किसानों की बैठक, कहा- जमीन गई तो छिन जाएगा रोजगार
औद्योगिक क्षेत्र के लिए 385 एकड़ भूमि अधिग्रहण का किसानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी, हनुमाननगर के सिनुआरा में नौ गांवों के किसानों की बैठक, कहा- जमीन गई तो छिन जाएगा रोजगार
औद्योगिक क्षेत्र के लिए 385 एकड़ भूमि अधिग्रहण का किसानों ने किया विरोध, आंदोलन की चेतावनी,
हनुमाननगर के सिनुआरा में नौ गांवों के किसानों की बैठक, कहा- जमीन गई तो छिन जाएगा रोजगार
दस्तक 7मीडिया /हनुमाननगर
हनुमाननगर प्रखंड के सिनुआरा गांव में रविवार को किसान नेता लक्ष्मेश्वर सिंह ‘पप्पू’ की अध्यक्षता में नौ गांवों के सैकड़ों किसानों की बैठक हुई। बैठक में राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक क्षेत्र विकास के लिए लगभग 385.48 एकड़ भूमि के प्रस्तावित अधिग्रहण का जोरदार विरोध किया गया। किसानों ने एकमत से कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे और आवश्यकता पड़ने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे।
बैठक में सिनुआरा, थलवारा, शोभेपट्टी, हिन्छौल, अम्माडीह, तरालाही, अहिला, ओझौल और डीहलाही गांवों के किसानों ने भाग लिया। किसानों का कहना था कि प्रस्तावित भू-अर्जन से आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो जाएंगे। खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और जमीन छिनने के बाद परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि बहादुरपुर एवं हनुमाननगर अंचल के जिन मौजों में औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहित की जा रही है, उन्हीं क्षेत्रों में आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे के लिए भी पहले ही कम मुआवजे पर जमीन ली जा चुकी है। इसके अलावा कई ग्रिड लाइन भी इन्हीं खेतों से होकर गुजर रही हैं तथा प्रस्तावित दरभंगा-मुजफ्फरपुर रेल लाइन के लिए भी किसानों की जमीन जाने की संभावना है।
बैठक में किसानों ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को हायाघाट प्रखंड स्थित वर्षों से बंद पड़ी अशोक पेपर मिल के लगभग 400 एकड़ परिसर में विकसित किया जाए। उनका कहना था कि वहां पर्याप्त सरकारी भूमि उपलब्ध है, जिससे सरकार को अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण पर खर्च भी नहीं करना पड़ेगा और किसानों की उपजाऊ जमीन भी सुरक्षित रहेगी।
किसानों ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को स्मारपत्र सौंपकर प्रस्तावित भूमि को भू-अर्जन से मुक्त करने की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।