नगर प्रशासन बिरौल की लचर व्यवस्था, शहीद भगत सिंह चौक से मास्टर चौक तक अवैध कब्जा, जनता परेशान

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।


एक तरफ शहर को जाम से मुक्त करने और सुव्यवस्थित बनाने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अनुमंडल के प्रमुख शहीद भगत सिंह चौक से लेकर पुल घाट और मास्टर चौक तक सड़कों पर हुए अवैध अतिक्रमण ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। आश्चर्य की बात यह है कि इन अतिक्रमणकारियों के आगे नगर पंचायत प्रशासन ने मानो घुटने टेक दिए हैं या यूं कहें कि प्रशासन ने इनके समक्ष पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया है।
नगर पंचायत प्रशासन का दोहरा चेहरा अब किसी से छिपा नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर आम जनता में चर्चा है कि इनके ‘दो दांत’ है।एक दिखाने के लिए और दूसरा खाने के लिए। ठीक एक महीना पहले प्रशासन ने बड़े जोर-शोर से सड़कों पर अवैध दुकानें लगाने वालों को अल्टीमेटम दिया था। चेतावनी दी गई थी कि यदि दोबारा सड़क पर अतिक्रमण किया गया, तो न केवल दुकानें हटाई जाएंगी बल्कि भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा। लेकिन, यह कार्रवाई सिर्फ कागजों और मीडिया में सुर्खियां बटोरने तक ही सीमित रही।
हकीकत यह है कि न तो दुकानें हटीं और न ही एक रुपये का जुर्माना वसूला गया। प्रशासन की यह ‘दिखावे की कार्रवाई’ सिर्फ एक ढकोसला साबित हुई।
सड़कों पर अवैध कब्जा जमाए बैठे कुछ सब्जी विक्रेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर एक बड़ा खुलासा किया। उनका कहना है कि यह अतिक्रमण महज कुछ दुकानों का मसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत नेटवर्क है। विक्रेताओं के अनुसार, “सड़कों पर सब्जी की पहुंच सीधे पुलिस से लेकर स्थानीय रसूखदार लोगों और माननीय के रसोई घर तक है।”
जब व्यवस्था के रक्षकों और नीति-निर्माताओं के घरों तक ही सड़क किनारे लगी दुकानों से मुफ्त या सुलभ सब्जियां पहुंच रही हों, तो भला नगर प्रशासन की हिम्मत कैसे होगी कि वे इन पर हाथ डाल सकें?

शहीद भगत सिंह चौक से मास्टर चौक तक का रास्ता शहर की लाइफलाइन है, लेकिन अतिक्रमण के कारण यहां हर दिन घंटों जाम लगा रहता है। स्कूल जाने वाले बच्चे, एम्बुलेंस, और दफ्तर जाने वाले लोग इस जाम की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन के लिए जनता की परेशानी से ज्यादा महत्वपूर्ण इन रसूखदारों की ‘रसोई’ को सजाए रखना है।
अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें प्रशासन के नोटिस का भी कोई डर नहीं रहा। अब सवाल यह उठता है कि क्या नगर पंचायत प्रशासन अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करेगा या फिर इसी तरह अवैध कब्जेदारों और भ्रष्टाचार के सामने नतमस्तक रहकर शहर को जाम की भट्टी में झोंकता रहेगा?
प्रशासन की चुप्पी ने शहर को अराजकता की ओर धकेल दिया है। क्या जनता की समस्याओं का समाधान कभी हो पाएगा, या यह व्यवस्था इसी तरह ‘दिखावे’ के नाम पर चलती रहेगी? या फिर…..।