गांवों पर 1200 रुपया होल्डिंग टैक्स के प्रस्ताव का बिहार ने किया विरोध, 16वें वित्त आयोग की शर्त पर उठाए सवाल, पंचायती राज मंत्री बोले- ग्रामीणों पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं, यूपी और छत्तीसगढ़ ने भी किया समर्थन
गांवों पर 1200 रुपया होल्डिंग टैक्स के प्रस्ताव का बिहार ने किया विरोध, 16वें वित्त आयोग की शर्त पर उठाए सवाल, पंचायती राज मंत्री बोले- ग्रामीणों पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं, यूपी और छत्तीसगढ़ ने भी किया समर्थन
गांवों पर 1200 रुपया होल्डिंग टैक्स के प्रस्ताव का बिहार ने किया विरोध, 16वें वित्त आयोग की शर्त पर उठाए सवाल,
पंचायती राज मंत्री बोले- ग्रामीणों पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं, यूपी और छत्तीसगढ़ ने भी किया समर्थन
दस्तक 7मीडिया /पटना
बिहार सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना औसतन 1200 रुपये होल्डिंग टैक्स एवं अन्य स्थानीय कर वसूली की प्रस्तावित व्यवस्था पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की राष्ट्रीय कार्यशाला में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि राज्य की ग्रामीण आबादी फिलहाल इतने बड़े कर का बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने आयोग से इस शर्त को शिथिल करने अथवा पूरी तरह समाप्त करने की मांग की।
मंत्री ने कहा कि गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना सरकार का उद्देश्य है, लेकिन एकमुश्त 1200 रुपये का वार्षिक कर लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह की मौजूदगी में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ ने भी इस शर्त का विरोध करते हुए इसमें संशोधन की मांग रखी।
दरअसल, 16वें वित्त आयोग ने ग्राम पंचायतों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थानीय कर संग्रह की शर्त प्रस्तावित की है। इसके तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 के बीच बिहार को करीब 52 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिलने का प्रावधान है। हालांकि पूरी राशि प्राप्त करने के लिए राज्य को कुल अनुदान का 20 प्रतिशत हिस्सा, करीब 1300 करोड़ रुपये, स्थानीय कर एवं अन्य आंतरिक संसाधनों से जुटाना होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में नगर निकायों की तर्ज पर डोर-टू-डोर कचरा उठाव, स्वच्छ पेयजल, नाली-गली निर्माण और स्ट्रीट लाइट जैसी बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज विभाग का प्रारंभिक प्रस्ताव राज्य वित्त विभाग से स्वीकृत होकर कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जाने की प्रक्रिया में था। लेकिन विभागीय मंत्री के सार्वजनिक विरोध के बाद अब सरकार इस नीति की समीक्षा कर ग्रामीणों पर संभावित आर्थिक बोझ कम करने के विकल्पों पर विचार कर सकती है।
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