13 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज, ACJM बेनीपुर ने SSP को दिए नए सिरे से जांच के आदेश

दस्तक 7 मीडिया ,बेनीपुर /विधि संवाददाता।

बहेरा थाना क्षेत्र के हनुमान नगर, वार्ड संख्या-25 निवासी 13 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM)-I बेनीपुर की अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पुलिस की अंतिम प्रतिवेदन (क्लोजर रिपोर्ट) को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए दरभंगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को 90 दिनों के भीतर नए अनुसंधानक की नियुक्ति कर अग्रेतर अनुसंधान कराने का निर्देश दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहेरा थाना कांड संख्या 514/25, दिनांक 13 नवंबर 2025, धारा 103(1)/3(5) बीएनएस के तहत दर्ज मामले में सूचक चंद्रमुनि देवी ने आरोप लगाया था कि उनकी 13 वर्षीय पुत्री 13 दिसंबर 2025 को घर में गमछे के फंदे से लटकी हुई मिली थी। प्राथमिकी में गांव की चार महिलाओं—संजू देवी, शीला देवी, अनीता देवी एवं सपना देवी—पर जमीन विवाद को लेकर पूर्व में जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था।

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि पुलिस अनुसंधान में कई गंभीर कमियां रही हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इतनी कम उम्र की बच्ची की मौत के पीछे के कारणों की समुचित जांच नहीं की गई। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि अनुसंधानक यह पता लगाने में विफल रहे कि घटना के समय आरोपित कहां थे तथा बच्ची के कथित आत्महत्या करने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत “तथ्य की भूल” आधारित अंतिम प्रतिवेदन को अस्वीकार करते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आलोक में मामला बंद करना न्यायोचित नहीं है। न्यायालय ने इसे अनुसंधान की गंभीर त्रुटि मानते हुए अग्रेतर अनुसंधान का आदेश दिया।

अपने आदेश में अदालत ने SSP को निर्देश दिया है कि वे एक अलग एवं सक्षम अनुसंधानक नियुक्त कर निम्न बिंदुओं की जांच सुनिश्चित करें—बच्ची की मौत का वास्तविक कारण एवं संभावित उद्देश्य, आरोपितों की घटना के समय की उपस्थिति (अलीबी), जमीन विवाद से जुड़े दस्तावेजों की जांच तथा सूचक एवं उसके परिवार की भूमिका की भी निष्पक्ष पड़ताल। जांच रिपोर्ट 90 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

सूचक पक्ष के अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला पीड़ित परिवार के लिए न्याय की नई उम्मीद लेकर आया है। उन्होंने कहा कि एक नाबालिग बच्ची की मौत को महज “तथ्य की भूल” बताकर बंद नहीं किया जा सकता और न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि सत्य सामने आने तक जांच जारी रहेगी।

वहीं, मृत बच्ची की मां चंद्रमुनि देवी ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि उनकी बेटी सामान्य और पढ़ने-लिखने वाली बच्ची थी तथा वह आत्महत्या नहीं कर सकती थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई जांच से उनकी बेटी को न्याय मिलेगा।