एसएसपी कार्यालय के आईटी प्रोग्रामर पर अवैध उगाही, महिला कर्मियों से दुर्व्यवहार और दबंगई के गंभीर आरोप के बाद भी अब तक ना कोई जांच हुई ना कोई कारवाई ,डीआईजी के जांच आदेश को भी कर दिया गया हवा हवाई ?
दस्तक 7 मीडिया /संजय कुमार राय
दरभंगा जिला में आईटी प्रोग्रामर पर लगे आरोप के मामले में डीआईजी का जांच आदेश पत्र हवा हवाई हो गया हे ,उन्होंने कहा था कि इस आरोपों की जांच नगर पुलिस अधीक्षक करेंगे ,लेकिन हफ्ते से अधिक दिन बीत जाने के बाद इस मामले में कोई जांच नहीं हुई हे।
बता दे कि दरभंगा पुलिस मुख्यालय में पदस्थापित आईटी प्रोग्रामर निशांत कुमार पर लगे गंभीर आरोपों के कई दिन बीत जाने के बाद पुलिस विभाग के वरीय पुलिस पदाधिकारियों द्वारा अब तक जांच नहीं हुई हे ? इसे लेकर जिला के महिला पुलिस कर्मियों में काफी आक्रोश हे।
सीसीटीएनएस में कार्यरत एक महिला कर्मी का ऑडियो और सरकारी नंबर पर एक चेट वायरल हुआ था ,जिसमें बात नहीं मानने पर स्पष्टीकरण भी पूछा गया दिखाई पर रहा हे।सीसीटीएनएस में कार्यरत कई महिला कर्मियों ने आईटी प्रोग्रामर के दिलफेंक कहानियों की करतूत भी बताया ,मीडिया में खबर आने के बाद अब तक ना ही कोई जांच हुई और ना ही कोई कारवाई।कई महिला कर्मी पहले से बता रही थी कि इसके खिलाफ आखिर शिकायत भी करें तो किनसे ,क्यूंकि जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारियों का इसके सिर पर हाथ हे? हाल में जिले के विभिन्न थानों में एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर को जोड़ने के लिये कंप्यूटर मेपिन्ग का कार्य कराया गया ,जिसमें कई थानेदारो की शिकायत थी कि प्रति कंप्यूटर पांच सौ रुपये की अवैध उगाही आई टी प्रोग्रामर द्वारा की गई।लेकिन जांच के बाद ही यह आरोप सही और गलत पाए जाते।
कई थानेदारों ने दबी जुबान में स्वीकार किया कि आईटी प्रोग्रामर द्वारा दबाव बनाकर पैसे लिए थे ।इस पत्रकार द्वारा उनसे पूछा गया कि इसकी शिकायत वरीय अधिकारियों से क्यों नहीं की गई, तो कुछ अधिकारियों ने कहा कि शिकायत करने पर वे स्वयं निशाने पर आ जाते।
महिला कर्मियों से दुर्व्यवहार के आरोप
मामले का सबसे गंभीर पक्ष महिला पुलिस कर्मियों से जुड़े आरोप हैं। विभिन्न थानों में सीसीटीएनएस शाखा में कार्यरत महिला कर्मियों ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि आईटी प्रोग्रामर द्वारा उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता था। आरोप है कि कथित “प्रेम जाल” में फंसाने का प्रयास किया जाता था और विरोध करने पर स्पष्टीकरण पूछकर या स्थानांतरण कर प्रताड़ित किया जाता था जो सरकारी नंबर के चैट पर स्पष्टीकरण भी साफ हे ?
सूत्रों का कहना है कि एसएसपी कार्यालय के अभिलेखों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कितनी महिला कर्मियों से स्पष्टीकरण पूछा गया और कितनों को संबंधित थानों से हटाया गया।लेकिन इन आरोपों पर अब तक जांच नहीं होना गंभीर विषय हे ?
बताया जा रहा है कि कार्यरत एक महिला कर्मी ने हिम्मत दिखाते हुए बातचीत का ऑडियो रिकॉर्ड किया, जो बाद में वायरल हो गया। सरकारी नंबर पर हुई बातचीत के प्रमाण भी हे।
थानेदारों पर दबाव और जासूसी का आरोप
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आईटी प्रोग्रामर का प्रभाव इतना बढ़ गया था कि कई थानेदार भी उसके व्यवहार से असहज रहते थे। आरोप है कि कुछ महिला कर्मियों के माध्यम से थानों की आंतरिक जानकारी जुटाई जाती थी और बाद में संबंधित थानेदारों पर दबाव बनाया जाता था।
इस माहौल में कई महिला कर्मियों ने खुद को असुरक्षित महसूस करने की बात कही है। उनका कहना है कि यदि ऐसे लोगों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्वतंत्र और सुरक्षित वातावरण में काम करना मुश्किल हो जाएगा।
डीआईजी ने लिया संज्ञान
मामला मीडिया में आने के बाद मिथिला क्षेत्र के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच का जिम्मा नगर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार को देने की बात कहीं ।लेकिन उन्होंने पांच दिन पहले कहा था कि उन्हें कोई जांच नहीं मिला हे,अब सवाल उठता हे डीआईजी का पत्र आखिर किसके पास गया ,जिन्होंने इस जांच को ही प्रभावित कर दिया ?
पुलिस विभाग के अंदर भी यह चर्चा तेज है कि आखिर एक आईटी प्रोग्रामर को इतनी शक्ति और संरक्षण कहां से मिल रहा था कि वह लंबे समय तक ऐसी घिनौनी हरकत करता रहा।
कई महिला कर्मियों का कहना है कि आरोप के सत्यापन के लिये सरकारी नंबर पर हुई चैट और ऑडियो ही काफी हे ,कई महिला कर्मी गवाह देने के लिये तैयार हे ,लेकिन गवाही देगी भी तो कहां ?जांच तो अधर में लटका हुआ हे।हालांकि दस्तक 7मीडिया इस ऑडियो /चैट की पुष्टि नहीं करता यह जांच का विषय हे।
