लालू-राबड़ी की सुरक्षा पर चली सरकार की कैंची, सरकारी बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस जारी,“सुरक्षा में कटौती और सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद बिहार की राजनीति में फिर आमने-सामने आए सत्ता पक्ष और राजद।”

दस्तक 7 मीडिया /पटना 

बिहार की राजनीति में शनिवार को बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। बिहार सरकार ने राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक कटौती करते हुए उनकी Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है। इसके साथ ही सरकार ने पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड के सरकारी आवास को खाली करने का अंतिम नोटिस भी जारी कर दिया है, जिससे सियासी हलकों में नई बहस छिड़ गई है।

जानकारी के अनुसार, पिछले करीब दो दशकों से लालू परिवार का प्रमुख ठिकाना रहा 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला अब बिहार सरकार के मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को वैकल्पिक रूप से 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित करते हुए पुराने बंगले को खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया है।

नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने सरकार के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार आवास खाली कराना चाहती है तो बल प्रयोग करवा ले, वे दबाव में आने वाली नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

इधर, राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी से Z+ श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है। नई व्यवस्था के तहत अब उन्हें 16 पुलिसकर्मी, तीन सादे कपड़ों में महिला सुरक्षा अधिकारी, तीन वर्दीधारी सुरक्षाकर्मी, एक बुलेटप्रूफ वाहन और पायलट वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

वहीं, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की Y श्रेणी सुरक्षा भी समाप्त कर दी गई है। अब उन्हें पूर्व मंत्रियों के लिए निर्धारित

मों के तहत केवल एक अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के कारण तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी सुरक्षा पूर्ववत जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि वर्ष 2010 की सुरक्षा गाइडलाइन के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाती है। चूंकि लालू प्रसाद यादव लंबे समय से किसी संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए नियमों के तहत उनकी सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया गया है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार की इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि विपक्ष की सबसे बड़ी आवाज को दबाने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से सुरक्षा में कटौती तथा आवास खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले लालू परिवार से जुड़े इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में और अधिक देखने को मिल सकता है।