बेनीपुर में विशेष न्यायालयों की मांग तेज, मुख्यमंत्री को भेजा गया आवेदन, 10 लाख आबादी को मिलेगा लाभ, न्याय के लिए 100 किलोमीटर तक नहीं करनी पड़ेगी दौड़ : बार एसोसिएशन
बेनीपुर में विशेष न्यायालयों की मांग तेज, मुख्यमंत्री को भेजा गया आवेदन, 10 लाख आबादी को मिलेगा लाभ, न्याय के लिए 100 किलोमीटर तक नहीं करनी पड़ेगी दौड़ : बार एसोसिएशन
बेनीपुर में विशेष न्यायालयों की मांग तेज, मुख्यमंत्री को भेजा गया आवेदन,
10 लाख आबादी को मिलेगा लाभ, न्याय के लिए 100 किलोमीटर तक नहीं करनी पड़ेगी दौड़ : बार एसोसिएशन
बेनीपुर ,विधि संवाददाता
बेनीपुर बार एसोसिएशन ने बेनीपुर अनुमंडल न्यायालय के क्षेत्राधिकार विस्तार एवं विशेष न्यायालयों की स्थापना की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को रजिस्टर्ड डाक से आवेदन भेजा है। एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुशील कुमार चौधरी ने कहा है कि वर्तमान में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित न्यायालय भवन, चार कोर्ट रूम तथा आवश्यक स्टाफ उपलब्ध होने के बावजूद बेनीपुर अनुमंडल में परिवार न्यायालय, एससी/एसटी एवं पॉक्सो मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायालय नहीं हैं।
आवेदन में मांग की गई है कि बेनीपुर एवं अलीनगर के साथ घनश्यामपुर, मनीगाछी, तारडीह और बहेरी प्रखंडों को भी बेनीपुर अनुमंडल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में शामिल किया जाए। साथ ही, परिवार न्यायालय अधिनियम-1984, एससी/एसटी अधिनियम-1989 तथा पॉक्सो अधिनियम-2012 के तहत विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाए।
सुशील कुमार चौधरी ने बताया कि मनीगाछी, बहेरी और तारडीह क्षेत्रों में दर्ज होने वाले कई मामलों का पर्यवेक्षण बेनीपुर डीएसपी एवं सीआई द्वारा किया जाता है, लेकिन इन मामलों की सुनवाई के लिए पक्षकारों को लगभग 100 किलोमीटर दूर दरभंगा सदर न्यायालय जाना पड़ता है। वहीं घनश्यामपुर क्षेत्र के लोगों को भी विशेष न्यायालयों में सुनवाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि दरभंगा सदर न्यायालय में पहले से ही हजारों मामले लंबित हैं, जिससे न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब हो रहा है। यदि क्षेत्राधिकार का विस्तार कर बेनीपुर में विशेष न्यायालय स्थापित किए जाते हैं तो लगभग 10 लाख आबादी को सीधा लाभ मिलेगा और न्याय लोगों के दरवाजे तक पहुंचेगा।
बार एसोसिएशन का दावा है कि इस व्यवस्था के लिए सरकार को नया भवन या अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल अधिसूचना जारी कर मौजूदा संसाधनों का उपयोग करते हुए शून्य अतिरिक्त खर्च में न्यायिक व्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। आवेदन में संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत त्वरित न्याय को नागरिकों का मौलिक अधिकार बताते हुए शीघ्र कार्रवाई की मांग की गई है