सरकारी कागजों में उलझा ‘नल-जल’, प्रचंड गर्मी में बूंद-बूंद को तरसती बिरौल की जनता,ओस से प्यास बुझाने जैसी व्यवस्था

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।

एक तरफ आसमान से बरसती आग और दूसरी तरफ सरकारी विभागों की सुस्त चाल ने नगर पंचायत बिरौल की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज कर दिया है। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल-जल योजना’ धरातल पर दम तोड़ चुकी है, और स्थिति यह है कि पिछले छह महीनों से इलाके में पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप है।
इस बीच, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और नगर विकास विभाग के बीच चल रहे ‘जिम्मेदारी के खेल’ ने जनता की परेशानियों को और बढ़ा दिया है।
PHED के अभियंता ने बीडीओ प्रदीप कुमार झा को जानकारी देते हुए कहा कि विभाग ने अब शहरी क्षेत्रों में जल सप्लाई का जिम्मा पूरी तरह से नगर पंचायत बिरौल (नगर विकास विभाग) को सौंप दिया है, क्योंकि PHED अब केवल ग्रामीण पंचायतों में ही काम करेगा।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि विभागों के इस आपसी फेरबदल और ‘लेटर-लेटर’ खेलने से आम जनता का क्या सरोकार? जनता को इन बातों से कोई मतलब नहीं है कि जिम्मेदारी का ठेका किस टेबल से किस टेबल पर गया। इस जानलेवा गर्मी में प्यासी जनता को सिर्फ पानी चाहिए, जो पिछले आधे साल से गायब है।
हांलांकि नगर पंचायत प्रशासन ने चौक चौराहे पर दिन के समय लोगों को पीने के लिए पानी का अस्थायी इंतजाम किया है। लेकिन लोगो को चाहिए स्थायी निदान। सरकार जिस ‘नल-जल योजना’ की पीठ थपथपाते नहीं थकती, वह बिरौल नगर पंचायत, सुपौल पंचायत में पूरी तरह ‘टांय-टांय फिस्स’ साबित हो चुकी है। छह महीने से सूखी पड़ी पाइपलाइनें सरकार के दावों की पोल खोल रही हैं। मजबूरन, नगर क्षेत्र की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता महंगे दामों पर निजी टैंकरों और अन्य वैकल्पिक साधनों पर आश्रित है। जिनके पास पैसे नहीं हैं, वे इस चिलचिलाती धूप में दूर-दराज के हैंडपंपों से पानी ढोने को मजबूर हैं। आखिर नगर पंचायत के अधिकारियों की इस लापरवाही और सुस्ती की सजा बिरौल की जनता कब तक भुगतेगी? क्या नए विभाग के पास जल आपूर्ति बहाल करने का कोई रोडमैप है, या फिर इस भीषण गर्मी में भी लोग पानी के लिए तरसते रहेंगे? फिलहाल, अधिकारी ‘आने वाला समय बताएगा’ की तर्ज पर समय काट रहे हैं और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है।