पॉक्सो केस की विभागीय जांच में निर्धारित समय के आधे घंटे बाद’ बुलावा! दरभंगा पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल ,सूचक के अधिवक्ता ने जताई आपति ?

सूचक को 11 बजे की सुनवाई के लिए 11:30 बजे किया गया फोन, यातायात डीएसपी कार्यालय की प्रक्रिया पर सवाल

दस्तक 7 मीडिया ,दरभंगा /संजय कुमार राय 

दरभंगा के यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली  सवालों के घेरे में है। इस बार मामला महिला थाना में दर्ज एक गंभीर पॉक्सो एक्ट केस से जुड़ी विभागीय जांच का है, जिसमें तत्कालीन महिला थानाध्यक्ष और वर्तमान में बहादुरपुर थाना में पदस्थापित पु०अ०नि० मनीषा कुमारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही संख्या-13/26 संचालित की जा रही है। इस जांच का संचालन वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) द्वारा किया जा रहा है।

पूरा विवाद उस समय खड़ा हो गया जब विभागीय जांच की निर्धारित तिथि और समय को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगा। विभागीय जांच की सुनवाई 23 मई 2026 को दिन के 11:00 बजे यातायात डीएसपी कार्यालय में निर्धारित थी। आदेश पत्र में स्पष्ट रूप से सूचक, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी तथा संबंधित पक्षों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

लेकिन आरोप है कि मामले की सूचक को उसी दिन लगभग 11:30 बजे यातायात थाना में पदस्थापित पुलिसकर्मी देवेंद्र कुमार द्वारा फोन कर सूचना दी गई कि उनकी उपस्थिति 11 बजे से जरूरी है। यानी जिस सुनवाई का समय 11 बजे तय था, उसकी सूचना सूचक को आधे घंटे बाद यानी 11.30 बजे दी गई।

“पहले सूचना क्यों नहीं दी गई?”

इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन की गंभीरता और कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 17 मई 2026 को ही आदेश निर्गत हो चुका था और सूचक का मोबाइल नंबर भी आदेश पत्र में अंकित था, तो फिर समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई?

सूचक एक नौकरी पेशा महिला हैं। ऐसे में यदि उन्हें पूर्व में सूचना दी जाती तो वे विधिवत अवकाश लेकर निर्धारित समय पर उपस्थित हो सकती थीं। लेकिन अंतिम समय में, वह भी सुनवाई शुरू होने के बाद सूचना देना पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है।

विभागीय आदेश में क्या कहा गया था?

पुलिस उपाधीक्षक (यातायात), दरभंगा द्वारा जारी आदेश में उल्लेख है कि “दरभंगा जिला विभागीय जांच (कार्यवाही) सं0-13/26 विरुद्ध पु०अ०नि० मनीषा कुमारी, तत्कालीन थानाध्यक्ष महिला थाना, वर्तमान बहादुरपुर थाना की संचिका का अवलोकन उपरांत संचालन की तिथि 23.05.2026 समय 11:00 बजे अधोहस्ताक्षरी कार्यालय, दरभंगा में निर्धारित की जाती है।”

आदेश में प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी, अपचारी अधिकारी तथा सूचक को उपस्थित रहने हेतु सूचित करने का निर्देश भी दिया गया था।बावजूद इसके डीएसपी कार्यालय के कर्मी ने निर्धारित समय के आधे घंटे बाद सूचक को खबर किया ,इसकी सूचना मिलते ही सूचक के विद्वान अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने आपत्ति जताते हुये यातायात थाना के उक्त कर्मी के व्हाट्सऐप पर एक आवेदन दिया ,कहा कि यह नियम के अनुकूल नहीं हे।कुछ घंटे बाद यातायात पुलिस कर्मी के द्वारा अगली तिथि 29मई 26को दिन के 11बजे समय निर्धारित कर उनके व्हाट्सएप पर मेसेज दिया।

गंभीर मामले में भी ढीला रवैया

यह मामला सामान्य विभागीय कार्रवाई नहीं बल्कि पॉक्सो एक्ट जैसे संवेदनशील प्रकरण से जुड़ा हुआ है। ऐसे मामलों में पुलिस की जवाबदेही और प्रक्रिया दोनों बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। बावजूद इसके, सूचक को समय पर सूचना नहीं देना विभागीय प्रक्रिया की पारदर्शिता और गंभीरता पर सवाल खड़ा कर रहा है ?

प्रशासनिक कार्यशैली पर चर्चा तेज

घटना के बाद पुलिस महकमे में भी चर्चा है कि यदि विभागीय जांच जैसी आधिकारिक प्रक्रिया में भी समय और सूचना प्रबंधन की ऐसी स्थिति रहेगी, तो पीड़ित पक्ष का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा। अब देखना यह होगा कि इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी कोई संज्ञान लेते हैं या नहीं।