CJI सूर्यकांत के समर्थन में युवा अधिवक्ताओं का ऐलान,

“फर्जी डिग्री माफिया के खिलाफ CJI की मुहिम का करेंगे समर्थन”

दस्तक 7 मीडिया/विधि संवाददाता, पटना 

अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति (युवा प्रकोष्ठ) के राष्ट्रीय महामंत्री सुशील कुमार चौधरी ने रविवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के खिलाफ चलाए जा रहे कथित दुष्प्रचार का तीखा विरोध किया। उन्होंने कहा कि देशभर के युवा अधिवक्ता एकजुट होकर CJI के समर्थन में खड़े हैं और न्यायपालिका की गरिमा पर किसी भी प्रकार के राजनीतिक हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि CJI सूर्यकांत द्वारा प्रयुक्त “परजीवी-कॉकरोच” शब्द बेरोजगार युवाओं, RTI कार्यकर्ताओं या सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के लिए नहीं था, बल्कि उन सफेदपोश तत्वों के लिए था जो फर्जी डिग्रियों के सहारे न्यायपालिका, पत्रकारिता और प्रशासनिक व्यवस्था में घुसपैठ कर चुके हैं। समिति ने आरोप लगाया कि ऐसे लोग व्यवस्था को भीतर से खोखला कर रहे हैं।

युवा प्रकोष्ठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के हवाले से कहा कि देश में एक लाख से अधिक फर्जी वकील सक्रिय हैं, जो योग्य और मेहनती कानून स्नातकों के भविष्य पर संकट बन चुके हैं। विज्ञप्ति में कहा गया कि CJI सूर्यकांत ने ऐसे “संवैधानिक दीमकों” के खिलाफ आवाज उठाकर साहसिक कदम उठाया है।

समिति ने मनोज कुमार झा द्वारा CJI को लिखे गए खुले पत्र को भी न्यायपालिका को राजनीतिक विवाद में घसीटने का प्रयास बताया। बयान में कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 121 न्यायाधीशों के आचरण पर सार्वजनिक चर्चा को सीमित करता है, ऐसे में इस प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी न्यायिक गरिमा पर सीधा आघात है।

प्रेस विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि “परजीवी” शब्द का प्रयोग न्यायपालिका पहले भी कर चुकी है। समिति ने Sahara बनाम SEBI मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने मीडिया ट्रायल को भी न्याय प्रक्रिया का “परजीवी” बताया था। उनके अनुसार, वर्तमान विवाद में निशाने पर केवल फर्जी डिग्री और भ्रष्ट तंत्र से जुड़े लोग हैं।

युवा प्रकोष्ठ ने CJI सूर्यकांत के पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े ऐतिहासिक मामलों में युवाओं के हित में निर्णय दिए हैं। बयान में कहा गया कि ऐसे न्यायाधीश को “युवा विरोधी” बताना राजनीतिक दुर्भावना और भ्रम फैलाने की कोशिश है।

अंत में समिति ने मांग की कि CJI के स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बयानबाजी बंद हो तथा देशभर में फर्जी डिग्री, फेक न्यूज और ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए। समिति ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।