विशेष रिपोर्ट :भीषण गर्मी में प्यासा बिरौल,पीएचईडी की लापरवाही से छह महीने से जलापूर्ति ठप,विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश
विशेष रिपोर्ट :भीषण गर्मी में प्यासा बिरौल,पीएचईडी की लापरवाही से छह महीने से जलापूर्ति ठप,विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश
विशेष रिपोर्ट :भीषण गर्मी में प्यासा बिरौल,पीएचईडी की लापरवाही से छह महीने से जलापूर्ति ठप,विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश
दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
एक ओर जहां पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है और भू-जल स्तर नीचे गिरने से चापाकल जवाब दे रहे हैं, वहीं बिहार सरकार का लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग बिरौल के लोगों की प्यास बुझाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण पाइप जलापूर्ति केंद्र, अफजला से जुड़ी इस परियोजना की हालत यह है कि पिछले छह महीनों से लोगों के घरों के नलों में पानी की एक बूंद तक नहीं टपकी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस जल मीनार से कभी भी सुचारू रूप से जलापूर्ति नहीं की गई। पिछले कई वर्षों से तकनीकी खराबी और विभागीय उदासीनता के कारण पानी की किल्लत बनी हुई थी, लेकिन अब स्थिति बदतर हो चुकी है। बीते छह महीनों से सप्लाई पूरी तरह बंद है, जिससे इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों को दूर-दराज के निजी चापाकलों या दूषित जल स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामीण पाइप जलापूर्ति केंद्र अफजला में विभाग का कार्यालय स्थापित है। इसके बावजूद, ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अभियंता या जिम्मेदार अधिकारी शायद ही कभी कार्यालय में बैठते हैं। कार्यालय में किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के न होने के कारण ग्रामीण अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। शिकायत सुनने वाला कोई नहीं होने से जलापूर्ति बहाल होने की उम्मीद भी धुंधली पड़ती जा रही है।
भीषण गर्मी में पानी के लिए मची त्राहि-त्राहि के बीच लोगों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि “सरकार हर घर नल का जल पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन धरातल पर विभाग के पास जनता की सुध लेने का समय नहीं है। यदि समय रहते विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और अभियंताओं की जवाबदेही तय नहीं की, तो क्षेत्र में जल संकट और विकराल रूप ले सकता है। अफजला स्थित कार्यालय को केवल नाम का केंद्र न बनाकर वहां अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और जलापूर्ति बहाल करना अब क्षेत्र की प्राथमिक आवश्यकता है।