करोड़ों की लागत, साल भर की मियाद: बिरौल के कोनीघाट पुल के निर्माण पर उठे सवाल, दरारें खोल रही हैं भ्रष्टाचार की पोल

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा। 

विकास की ‘लाइफलाइन’ कहे जाने वाले बिरौल के कोनीघाट पुल के निर्माण में गुणवत्ता की गंभीर अनदेखी का मामला सामने आया है। महज एक वर्ष पूर्व जनता को समर्पित किए गए इस पुल की हालत अभी से जर्जर होने लगी है, जिससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश है, बल्कि विभाग की कार्यशैली पर भी उंगली उठ रही है।

बिरौल के पूर्वी और पश्चिमी भाग को जोड़ने वाला यह पुल इलाके के लिए सामरिक और आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। करोड़ों की लागत से निर्मित इस पुल के जरिए दरभंगा और समस्तीपुर जिलों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता है। सिसौनी से शंकर रोहाड़ तक जाने वाली इस सड़क को क्षेत्र की जीवन रेखा माना जाता है, लेकिन अब यह रेखा खुद ही खतरे में नजर आ रही है।

पुल की सतह (ढलाई) पर कई जगहों पर गहरी दरारें उभर आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के समय मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। एक साल के भीतर ही ढलाई का उखड़ना और कंक्रीट का टूटना साफ़ संकेत दे रहा है कि निर्माण कंपनी ने काम में खानापूर्ति की है।”यह पुल हमारे लिए उम्मीद की किरण था, लेकिन इसकी दरारें देखकर डर लगता है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? निर्माण कंपनी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए

पुल निर्माण विभाग की भूमिका भी इस मामले में संदिग्ध नजर आ रही है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़े पुल की उम्र दशकों में होती है, लेकिन यहाँ महज 12 महीने में ही ढांचा जवाब देने लगा है। विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच में बरती गई सुस्ती के कारण आज करोड़ों की सरकारी संपत्ति और लोगों की जान जोखिम में है।

कनेक्टिविटी पर खतरा–यदि दरारें बढ़ती हैं, तो भारी वाहनों के आवागमन से पुल को बड़ी क्षति हो सकती है, जिससे दो जिलों का संपर्क टूट जाएगा। जनता की गाढ़ी कमाई से दिया गया टैक्स भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता दिख रहा है।

कोनीघाट पुल की वर्तमान स्थिति सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को चुनौती दे रही है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और ग्रामीण अब इस मामले में उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्या प्रशासन समय रहते इस पुल की मरम्मत और गुणवत्ता की जांच कराएगा, या फिर एक और पुल हादसे की सुर्खियों का इंतजार किया जाएगा?