बिरौल: वाहन जांच के नाम पर केवल दोपहिया वाहनों पर ‘नकेल’, ऑटो और टोटो चालकों को मिल रही ‘खुली छूट’

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

बिरौल थाना क्षेत्र के विभिन्न चौक-चौराहों पर पुलिस द्वारा की जा रही वाहन जांच अब स्थानीय लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के बीच चर्चा और असंतोष का विषय बन गई है। आम जनता का आरोप है कि प्रशासन का सारा जोर सिर्फ दोपहिया वाहनों की जांच और उनसे राजस्व (जुर्माना) वसूली पर है, जबकि नियमों की धज्जियां उड़ा रहे तीन पहिया वाहनों (ऑटो और टोटो) को नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि पुलिस मुख्य सड़कों पर घेराबंदी कर केवल बाइक सवारों के हेलमेट, लाइसेंस और इंश्योरेंस की कड़ाई से जांच करती है। इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन सवाल तब खड़ा होता है जब उसी रास्ते से ओवरलोडेड और बिना कागजात के गुजर रहे टोटो और ऑटो को बिना किसी रोक-टोक के जाने दिया जाता है। लोगों का मानना है कि प्रशासन का उद्देश्य सड़क सुरक्षा से अधिक केवल सरकारी खजाना भरना रह गया है।
जांच के अभाव में बिरौल की सड़कों पर टोटो और ऑटो चालकों का मनोबल सातवें आसमान पर है।
इनमें से कई वाहन ‘रिजेक्ट’ श्रेणी के हैं या उनके पास फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं है। बीच सड़क पर कहीं भी वाहन रोकना और बेतरतीब तरीके से मोड़ना आम बात हो गई है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
कई नाबालिग या बिना लाइसेंस वाले युवक इन वाहनों को चला रहे हैं, जो यात्रियों की जान जोखिम में डालते हैं। शुक्रबार को अनियंत्रित टोटो बीच सड़क पर पलट जाने से अपने कार्य पर जा रही सरकारी महिला कर्मी, शिक्षक सहित कई लोग जख्मी हो गया। बताया जाता है कि कई नाबालिग या बिना लाइसेंस वाले युवक इन वाहनों को चला रहे हैं, जो यात्रियों की जान जोखिम में डालते हैं। आम नागरिकों और बाइक सवारों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे भेदभाव छोड़कर तीन पहिया वाहन की भी सघन तलाशी लेनी चाहिए। आम लोगों का कहना है कि अगर पुलिस इन पुराने और अनफिट तीन पहिया वाहनों की फिटनेस और कागजात की जांच शुरू कर दे, तो सड़क से आधे अवैध वाहन स्वतः ही हट जाएंगे। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई से लोगों में यह संदेश जा रहा है कि कानून केवल कमजोर और अनुशासित दिखने वाले वर्ग के लिए है। जरूरत है कि बिरौल पुलिस एक व्यापक अभियान चलाए जिसमें दोपहिया के साथ-साथ पैसेंजर वाहनों की भी गंभीरता से जांच हो, ताकि सड़कों पर व्यवस्था कायम हो सके।