दहेज मुक्ति के संकल्प और ‘काला कानून’ के विरोध के साथ मना परशुराम प्राकट्योत्सव

दस्तक 7 मिडिया, बिरौल, दरभंगा। 

मिथिला की पावन धरती पर भगवान परशुराम के प्राकट्योत्सव के अवसर पर भक्ति, शक्ति और सामाजिक सुधार का एक अनूठा संगम देखने को मिला। राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों और ब्राह्मण समाज की वर्तमान चुनौतियों पर भी पुरजोर प्रहार किया। कार्यक्रम का आगाज डुमरी जीरो माईल से बाबा कुशेश्वरनाथ तक निकली एक विशाल मोटरसाइकिल शोभा यात्रा के साथ हुआ। जय परशुराम के उद्घोष से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा। इसके पश्चात पोखराम गांव में भगवान परशुराम की भव्य प्रतिमा का पूजनोत्सव और हवन संपन्न हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने आहुति दी। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद आयोजित मैथिली सांस्कृतिक कार्यक्रम ने समां बांध दिया। मिथिला के सुप्रसिद्ध गायक राम बाबू झा, भगवान झा, मनटुन मिश्र, सुबोध जी और भैरव जी की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वागत गान के साथ शुरू हुई इस संध्या में मिथिला की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिली। इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सुधार रहा। ‘दहेज मुक्त भारत मंच’ की महिला अध्यक्षा रितु चौधरी ने मंच से एक सशक्त संदेश दिया। उन्होंने ब्राह्मण समाज से अपील करते हुए कहा कि, हमें अपने बच्चों का विवाह दहेज मुक्त कर समाज के सामने एक आदर्श स्थापित करना चाहिए। कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में ‘ब्राह्मण संवाद सभा’ का आयोजन हुआ, जो चर्चा का केंद्र रहा। जहां एक ओर भगवान परशुराम के आदर्शों पर विस्तार से चर्चा हुई, वहीं दूसरी ओर समाज के ऊपर हो रहे अत्याचारों को लेकर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए गए। महासभा ने सरकार द्वारा लाए गए कुछ कानूनों को ‘काला कानून’ करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया और ब्राह्मण समाज की सुरक्षा व सम्मान के लिए एकजुट होने का संकल्प लिया।