छात्रों की जान से खिलवाड़, बिरौल डीपीएस की ‘कबाड़’ वाहन और विभागीय कार्रवाई और अधिकारी की चुप्पी पर उठे सवाल,पुलिस कार्रवाई लम्बित

दस्तक 7 मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा। 

शिक्षा के नाम पर व्यापार और सुरक्षा के नाम पर शून्य। घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के बंगराहटा-बिरौल मुख्य मार्ग पर पिछले दिनों हुए डीपीएस बिरौल के वाहन हादसे ने निजी स्कूलों की काली सच्चाई को उजागर कर दिया है। यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मासूमों की जिंदगी के साथ किया गया एक गंभीर खिलवाड़ है।

सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, दुर्घटनाग्रस्त वाहन के पास न तो वैध कागजात थे और न ही वह सड़क पर चलने की स्थिति में था। जिस वाहन को ‘रिजेक्ट’ घोषित कर दिया जाना चाहिए था, स्कूल संचालक उसे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को ढोने के लिए धड़ल्ले से उपयोग कर रहे थे।

बड़ा सवाल क्या स्कूल संचालक को बच्चों की जान से ज्यादा प्यारे चंद सिक्के हैं? ‘कबाड़’ बन चुके वाहनों को सड़कों पर उतारना यह साबित करता है कि यहां बच्चों की सुरक्षा नहीं, बल्कि ‘मुनाफे की अंधी दौड़’ सर्वोपरि है।

इस घटना के बाद जनप्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। प्रेस के माध्यम से अनुमंडल प्रशासन से कड़ी मांग की गई है कि डीपीएस बिरौल के अलावा अन्य क्षेत्रों के सभी निजी स्कूलों के वाहनों की फिटनेस, इंश्योरेंस और परमिट की तत्काल जांच की जाए।

बिना कागजात के वाहन चलाने वाले स्कूल संचालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने पर विचार किया जाए।

हादसे के कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं आना उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। अभिभावकों के बीच अब डर का माहौल है ,क्या सुबह स्कूल वाहन में चढ़ने वाला उनका बच्चा शाम को सुरक्षित घर लौटेगा?

अगर विभागीय अधिकारी और संबंधित प्रशासन अब भी नींद से नहीं जागा, तो किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार करना बेईमानी होगी। बंगराहटा-बिरौल मार्ग पर बिखरे कांच के टुकड़े चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि अगली बार किस्मत इतनी मेहरबान नहीं होगी।