पत्रकारों की पीड़ा पर बोले योगी: “जो सबकी आवाज़ उठाते हैं, उनकी सुनने वाला कौन?”बिहार में भी उठी मांग
पत्रकारों की पीड़ा पर बोले योगी: “जो सबकी आवाज़ उठाते हैं, उनकी सुनने वाला कौन?”बिहार में भी उठी मांग
पत्रकारों की पीड़ा पर बोले योगी: “जो सबकी आवाज़ उठाते हैं, उनकी सुनने वाला कौन?”बिहार में भी उठी मांग
दस्तक 7मीडिया /पटना
समाज की आवाज़ बनकर हर मुद्दे को पत्रकार जनता तक पहुंचाते हैं, लेकिन जब खुद पत्रकार संकट में होते हैं जैसे बीमारी, आर्थिक तंगी या अन्य कठिन हालात ,तब उनकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं होता। यह बात उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही, जिसका वीडियो इन दिनों बिहार के पत्रकारों के विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में तेजी से वायरल हो रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने पत्रकारों के बीच नई बहस छेड़ दी है। बिहार के पत्रकार अब यह सवाल उठा रहे हैं कि जब उत्तर प्रदेश सरकार पत्रकारों की समस्याओं को लेकर संवेदनशीलता दिखा सकती है, तो बिहार सरकार क्यों नहीं?
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि बड़े मीडिया संस्थानों से जुड़े और सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को सुविधाएं जरूर मिलती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे पत्रकार भी हैं जो फील्ड में दिन-रात मेहनत करते हैं, जोखिम उठाते हैं, फिर भी किसी प्रकार की सरकारी सहायता से वंचित हैं। उन्होंने इस असमानता को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बिहार के पत्रकारों का कहना है कि राज्य में भी बड़ी संख्या में स्ट्रिंगर और छोटे संस्थानों से जुड़े पत्रकार काम कर रहे हैं, जो अक्सर कम संसाधनों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे पत्रकारों को न तो स्वास्थ्य सुरक्षा मिलती है और न ही आकस्मिक सहायता की कोई ठोस व्यवस्था।
वायरल वीडियो के बाद अब बिहार में पत्रकार संगठनों के बीच यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि राज्य सरकार भी पत्रकारों के लिए ठोस नीति बनाए। खासकर बीमारी, दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में आर्थिक सहायता, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।हालांकि बिहार सरकार ने सरकारी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को पेंशन देने की सुविधा ऐलान कर चुकी हे यही नहीं प्रीमियम की राशि पत्रकारों से लेकर बीमा भी मुहैया करा रहीं हे लेकिन कई पत्रकार हे जो छोटे संस्थानों में काम कर रहें हे लेकिन ऐसे लाभों से वंचित हे।
पत्रकारों का मानना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत रखने के लिए पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान बेहद जरूरी है। अब देखना यह होगा कि बिहार सरकार इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या पत्रकारों के हित में कोई ठोस कदम उठाती हे या नहीं।