“खाकी में भी धड़कता है दिल: बिहार पुलिस बनी फरिश्ता, बचाई कई लोग/मासूम जिंदगियां”।कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आये ,पुलिस ने कायम की मानवता की मिशाल।
“खाकी में भी धड़कता है दिल: बिहार पुलिस बनी फरिश्ता, बचाई कई लोग/मासूम जिंदगियां”।कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आये ,पुलिस ने कायम की मानवता की मिशाल।
“खाकी में भी धड़कता है दिल: बिहार पुलिस बनी फरिश्ता, बचाई कई लोग/मासूम जिंदगियां”।कुछ महीनों में कई ऐसे मामले सामने आये ,पुलिस ने कायम की मानवता की मिशाल।
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
बिहार में पुलिस का मानवीय चेहरा झलक रहा हें ,कई जिलों से ऐसी खबर आती रहती हें जिसे सुनकर आपकी इंसानियत भी जाग उठेगी।एक तरफ डीजीपी का सख्त संदेश “भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिसिया कार्यशैली से खेलने वालों पर शख्त कारवाई हें ,वहीं बेहतर पुलिसिंग करने वालों को पुरस्कृत भी करती हें और ऐसे में जब कोई पुलिसकर्मी मानवता और इंसानियत के बीच काम करती हें फिर क्या कहना और बिहार पुलिस ऐसा कर भी रही हें ,कुछ महीनों के दौरान ऐसा कई मामला सामने आया हें।
अक्सर सख्ती और कानून के पालन से जुड़ी पुलिस की छवि के पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा भी छिपा होता है। यह सच इन दिनों बिहार के अलग-अलग जिलों से सामने आ रही घटनाओं में साफ दिखाई दे रहा है जहां खाकी सिर्फ कानून लागू नहीं कर रही, बल्कि इंसानियत की मिसाल भी पेश कर रही है और पुलिस मुख्यालय ऐसे पुलिसकर्मियों को” चावासी” देने में पीछे नहीं हटती।
पुलिस आपके खिलाफ नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा के लिए है। वह कानून के दायरे में बंधी है और तभी कार्रवाई करती है, जब कोई नियमों का उल्लंघन करता है। लेकिन जब बात इंसानियत की आती है, तो वही पुलिस सबसे आगे खड़ी नजर आती है।
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री के काफिले के आगमन के दौरान एक दिल दहला देने वाला पल सामने आया, जब एक नन्ही बच्ची अचानक सड़क पर दौड़ पड़ी। तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच यह एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकता था, लेकिन एक महिला सिपाही की सतर्क नजर ने सब कुछ बदल दिया। उसने बिना एक पल गंवाए बच्ची को रोक लिया और एक अनहोनी टल गई।
विधानसभा गेट नंबर 4 पर स्कूटी दुर्घटना के बाद ट्रैफिक पुलिस की तत्परता भी काबिले-तारीफ रही। घायल व्यक्ति को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया, परिजनों को सूचना दी गई और समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई गई।
एक और भावुक कर देने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब एक महिला सिपाही ने एक दिव्यांग अभ्यर्थी को गोद में उठाकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया। यह सिर्फ ड्यूटी नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण था।
मानवता की सबसे बड़ी मिसाल तब देखने को मिली, जब डायल-112 में तैनात पुलिस अधिकारी ने एक महिला और उसके बच्चे की जिंदगी बचा ली। विक्रमशिला पुल से गंगा में छलांग लगाने जा रही उस महिला को नवगछिया पुलिस जिला में तैनात पु०अ०नि० सिकंदर कुमार ने अपनी सूझबूझ और तत्परता से रोक लिया। उनके इस साहसिक कदम ने दो जिंदगियों को नई उम्मीद दे दी।
ऐसे अनेक उदाहरण यह साबित करते हैं कि बिहार पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली ही नहीं, बल्कि मानवता की भी सच्ची संरक्षक है। पुलिस मुख्यालय द्वारा ऐसे उत्कृष्ट कार्यों के लिए समय-समय पर सम्मानित करना इस बात का प्रमाण है कि खाकी में सिर्फ ताकत ही नहीं, दिल भी धड़कता है।