बिरौल में ‘अस्मिता माइक्रो फाइनेंस’ का बड़ा फर्जीवाड़ा, दो लाख के लालच में महिलाओं की गाढ़ी कमाई लेकर लुटेरे फरार,सुचना तंत्र फेल,
बिरौल में ‘अस्मिता माइक्रो फाइनेंस’ का बड़ा फर्जीवाड़ा, दो लाख के लालच में महिलाओं की गाढ़ी कमाई लेकर लुटेरे फरार,सुचना तंत्र फेल,
बिरौल में ‘अस्मिता माइक्रो फाइनेंस’ का बड़ा फर्जीवाड़ा, दो लाख के लालच में महिलाओं की गाढ़ी कमाई लेकर लुटेरे फरार,सुचना तंत्र फेल,
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
बिना जांच-पड़ताल और रातों-रात अमीर बनने या कर्ज के जाल में फंसने की मानवीय कमजोरी का फायदा उठाकर ठगों ने एक बार फिर बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। बिरौल थाना क्षेत्र के सुपौल बाजार (खोड़ागाछी मार्ग) में महज 8 दिन पहले खुली ‘अस्मिता माइक्रो फाइनेंस’ नामक कंपनी करोड़ों की ठगी कर रातों-रात चंपत हो गई। यह घटना न केवल आम जनता की जागरूकता पर, बल्कि स्थानीय पुलिसिया तंत्र और सूचना विभाग की विफलता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है।
इस फर्जीवाड़े की स्क्रिप्ट बड़ी ही शातिर तरीके से लिखी गई थी। 18 मार्च के आसपास सक्रिय हुए इन ठगों ने बिरौल समेत आधा दर्जन प्रखंडों कुशेश्वरस्थान पूर्वी, किरतपुर, गौड़ा बौराम, अलीनगर और घनश्यामपुर की भोली-भाली ग्रामीण महिलाओं को निशाना बनाया। कंपनी के संचालक ने यहां आए महिलाओं को मात्र 5,000 की ‘प्रोसेसिंग फीस’ जमा करने पर 2 लाख का बिना किसी गारंटी वाला लोन देने का आश्वासन दिया और कहा कि 26 मार्च 2026 तक लोन की राशि सीधे बैंक खाते में क्रेडिट हो जाएगी। हद तो यह है कि 25 मार्च की देर रात तक कंपनी के एजेंट गांवों में घूम-घूम कर महिलाओं से पैसे वसूलते रहे, जबकि वे भागने की पूरी तैयारी कर चुके थे। गुरुवार (26 मार्च) की सुबह जब महिलाओं के खातों में पैसे नहीं आए, तो सैकड़ों महिलाएं उम्मीद और आशंका के बीच दफ्तर पहुंचीं। वहां का मंजर देखकर सबके होश उड़ गए। दफ्तर पर ताला लटका था, बोर्ड हटा लिए गए थे और सभी कर्मियों के मोबाइल स्विच ऑफ थे। अपनी मेहनत की कमाई डूबते देख आक्रोशित महिलाओं ने सड़क पर उतरकर जमकर हंगामा किये।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, वहां से बिरौल थाना महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। एक भीड़भाड़ वाले इलाके में बिना किसी वैध लाइसेंस, बिना कागजी सत्यापन और बिना किसी रजिस्ट्रेशन के 8 दिनों तक सैकड़ों लोगों का आना-जाना लगा रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे थाने की नाक के नीचे लूट की दुकान खोल सकते हैं?
थानाध्यक्ष चन्द्र मणी ने बताया कि फिलहाल किसी भी पीड़िता की ओर से लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही आवेदन मिलता है, प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
आम लोगों के लिए सीख और चेतावनी, याद रखें ये बातें– यह घटना एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी वित्तीय संस्था के साथ जुड़ने से पहले इन बातों का ध्यान अवश्य रखें।
कोई भी पंजीकृत बैंक या संस्था लोन देने के नाम पर पहले नकदी रुपए की मांग नहीं करती है।बिना गारंटी और बहुत कम ब्याज दर वाले विज्ञापनों से सावधान रहें। संस्था का RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) से निबंधन या लाइसेंस जरूर चेक करें। स्थानीय प्रशासन को संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें।