मेहनत और संकल्प की मिसाल, सौरभ कुमार ने यूपीएससी में लहराया परचम, 689वीं रैंक पाकर बढ़ाया बिरौल का मान

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

सफलता किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, बस उसे पाने के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम की आवश्यकता होती है। इसे सच कर दिखाया है दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर पंचायत के नवटोल गांव निवासी सौरभ कुमार ने। सौरभ ने देश की सबसे प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 689 वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने गांव, बल्कि पूरे अनुमंडल का नाम रोशन किया है।
सौरभ की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के एक निजी स्कूल से शुरू हुई, लेकिन उनकी जड़ें हमेशा अपनी मिट्टी से जुड़ी रहीं। उन्होंने दरभंगा के एक निजी विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा ससम्मान उत्तीर्ण की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का रुख किया, जहां से उन्होंने इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। तकनीक के प्रति रुचि उन्हें भुवनेश्वर ले गई, जहां से उन्होंने बीटेक की डिग्री हासिल की।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ का लक्ष्य स्पष्ट था—देश सेवा। इसके लिए वे दिल्ली चले गए और कड़ी मेहनत में जुट गए। सौरभ के पिता मदन कुमार झा, जो एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, ने गर्व के साथ बताया कि यह सफलता सौरभ को उनके तीसरे प्रयास में मिली है। असफलताओं से डरे बिना, लगातार सुधार और कड़ी तपस्या ने अंततः उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
अपनी इस शानदार उपलब्धि पर सौरभ कुमार ने विनम्रता के साथ इसका श्रेय अपनी माता सोना देवी, पिता मदन कुमार झा और अपने गुरुजनों को दिया है। सौरभ का मानना है कि परिवार का अटूट विश्वास और निरंतर की गई मेहनत ही उनकी इस जीत का मुख्य आधार है। सौरभ की यह उपलब्धि इलाके के उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।