कुशेश्वरस्थान के उसरी में श्रीराम महायज्ञ: शिव–पार्वती विवाह प्रसंग ने बांधा समां

दस्तक 7मीडिया ,कुशेश्वरस्थान /प्रशांत कुमार 

कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के उसरी गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम महायज्ञ के दूसरे दिन कथा पंडाल में भक्ति और आस्था की अविरल धारा बहती रही। दूसरे दिन शिव–पार्वती विवाह प्रसंग का अत्यंत भव्य, मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने देर रात तक कथा का रसास्वादन किया।

कथा के दौरान माता पार्वती की कठोर तपस्या का उल्लेख करते हुए बताया गया कि किस प्रकार उन्होंने पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक घोर साधना की। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर शिव ने विवाह के लिए सहमति प्रदान की। इसके बाद शिव विवाह की तैयारी और बरात प्रस्थान का प्रसंग आते ही पंडाल में उत्साह और उल्लास का वातावरण बन गया।

विशेष रूप से शिव बरात का वर्णन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कथा में बताया गया कि भगवान शिव नंदी पर सवार होकर जब बरात लेकर हिमालय के महल की ओर चले तो उनके साथ भूत-प्रेत, गण, योगी, नाग और विभिन्न अलौकिक रूपधारी गण भी शामिल थे। किसी के शरीर पर भस्म लिपटी थी तो कोई विचित्र वेशभूषा में था। इस अनोखी बरात का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु रोमांचित हो उठे।

कथा वाचिका ने हास्य और भावपूर्ण शैली में बताया कि जब माता मैना ने शिव के विरूप स्वरूप को देखा तो वे क्षणभर के लिए चिंतित हो उठीं। तब देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव ने अपना दिव्य, सुंदर और सौम्य रूप धारण किया। शिव के उस अलौकिक स्वरूप को देखकर सभी के हृदय में आनंद की लहर दौड़ गई और विवाह की तैयारियां पूरे हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हुईं।

विवाह समारोह के प्रसंग में वैदिक मंत्रोच्चार, देवी-देवताओं की उपस्थिति और हिमालय द्वारा कन्यादान का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया गया। कथा पंडाल ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए।

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि महायज्ञ को लेकर गांव में उत्सव जैसा माहौल है। प्रतिदिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुरक्षा, पेयजल और प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था की गई है। दूसरे दिन की कथा ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति और आस्था की ज्योति प्रज्वलित कर दी। समिति ने अधिक से अधिक लोगों से कथा श्रवण कर धर्म लाभ लेने की अपील की है।