मनरेगा जेई का कमाल, कार्य एक,योजना दो का खेल। मामला दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड के रुपौली पंचयात का है।
मनरेगा जेई का कमाल, कार्य एक,योजना दो का खेल। मामला दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड के रुपौली पंचयात का है।
मनरेगा जेई का कमाल, कार्य एक,योजना दो का खेल। मामला दरभंगा जिले के हनुमाननगर प्रखंड के रुपौली पंचयात का है।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा/हनुमाननगर
सरकार चाहे लाख यतन कर ले,कानून प्रायोजित मनरेगा योजना को बीबी जी राम जी बना दे,लेकिन यदि इसकी उचित निगरानी, और अधिकारी संवेदनशील न हों,तो यह योजना बिभागीय अधिकारी और बिचौलिए की भेंट चढ़ जाती है।जानकारी रहते महज चंद कमीशन की लालच में मजदूर हितैषी इस योजना का लाभ न तो मजदूरों को मिल पाता है,और न हीं आम लोगों को हीं।मनरेगा योजना के संचालन में नियम और बिभागीय अधिकारियों के बीच,” तू डाल-डाल,तो मैं पात-पात ” की कहावत चरितार्थ हो रही है।जी हां,यह वाकया हनुमाननगर क्षेत्र के ग्राम पंचायत रुपौली में लोगों के बीच चर्चा का बिषय बना हुआ है।
प्रखंड पंचायत समिति योजना मद से रुपौली पंचायत में संचालित मनरेगा योजना के संचालन में अनियमितता तथा एक हीं योजना के बीच महज एक दिवाल खड़ा कर दो नामों से एक हीं कार्य का दो योजनाओं का संचालन किये जाने का चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है।भौतिक रुप से मौजूद एक पुलिया के बीच महज चंद ईंटे की एक दिवाल जोड़ने और एक हीं योजना के बदले नाम बदलकर दो पुलिया निर्माण के नाम पर 14 लाख से अधिक की राशि पोर्टल पर खर्च दर्शाई गई है। दरभंगा जिले के प्रखंड हनुमाननगर अंतर्गत रुपौली पंचायत में मनरेगा योजना के तहत सरकारी राशि की कथित लूट का खेल जारी है,और इस कार्य में प्रखंड मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी, बिभागीय कनीय अभियंता, कार्य ऐजेन्सी, और बिचौलिए शामिल हैं। नियमानुसार, कार्यस्थल पर योजना कार्य से संबंधित शिलापट्ट लगाये जाने की बाध्यता है।योजना में गोपनीयता बनी रहे,इसके लिए कार्य ऐजेन्सी द्वारा स्थल पर शिलापट्ट नही लगाई गई है। ग्रामीण विनोद चौधरी,डघरौल के राजीव राय आदि ने कहा है कि एक ही स्थान पर एक पुलिया का निर्माण कर दो अलग-अलग योजनाओं की राशि निकासी करने की साजिश की जा रही है। नियमानुसार, किसी भी योजना का प्राक्कलन में योजना की उपयोगिता का प्रमाण पत्र संबंधित कनीय अभियंता देते हैं। यहां जेई का जादूई दिमाग ने पुलिया के बीच में एक दिवाल रुपी पाया का प्रावधान कर मनरेगा पोर्टल पर पहली योजना “रुपौली पहल में पुलिया निर्माण” के नाम से दर्शा रहा है, जिसकी प्राक्कलित राशि 5 लाख 33 हजार 562 रुपये है। इस योजना मद में मजदूरी की राशि 98 हजार 130 रुपए की निकासी हो चुकी है। मटिरियल पेंमेंट लंबित है। इसकी कार्य अवधि 8 मार्च 2025 से 8 जुलाई 2025 अंकित है। वहीं,आश्चर्यजनक रुप से दूसरी योजना “पंचायत रुपौली पहल में राजेन्द्र राय के खेत के नजदीक पुलिया निर्माण” शीर्षक से दर्शाई गई है, जिसमें 8 लाख 87 हजार 959 रुपये खर्च होने की बात पोर्टल पर दर्ज है। जिसमें मजदूरों के नामे 95 हजार 113 रुपए का भुगतान हो चुका है। इसमें भी मटेरियल का भुगतान नहीं हुआ है। इस कार्य योजना की अवधि 20 मई 2025 से 20 सितंबर 2025 दर्शाया गया है।कार्यस्थल पर दोनो हीं योजना का स्थल एक ही है। यहां उलेखनीय है कि शायद जेई साहब यह भूल गये की योजना प्राक्कलन की उपयोगिता प्रमाण पत्र स्वंय जेई हीं देते हैं।ऐसे में आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि महज दो माह के अन्तराल में साहब की क्या विवशता रही कि एक पुलिया निर्माण का दो स्टीमेट उन्हें बनाना पड़ा।वहीं हद तो यह है कि जेई ने अपने जादूई दिमाग के बूते पुलिया के बीच में महज चंद हजार ईंटों की दिवाल जोड़वाकर एक बड़े खेल को अंजाम दिया है।उनके दिमाग और सहयोग से कार्य ऐजेंसी ने बिभागीय लोगों को मेल में लेकर निर्मित एक पुलिया के बीच में महज एक दिवाल खड़ा कर पुलिया निर्माण काअलग-अलग नाम बदलकर दो योजनाओं की राशि गवन करने की चालाकी किया है। ऐसे में बिभाग द्वारा दो योजनाओं का दर्शाया जाना इस खेल में बिभागीय संलिप्तता का संकेत है,जो अपने आप में बड़ा प्रश्न चिन्ह है,यदि इसका स्थलीय निश्पक्ष जांच की जाय तो निर्मित एक पुलिया हीं फर्जीवाड़े का प्रमाण साबित होगा। इसकी जानकारी मिलने पर सीपीआई(एम) के नेता श्याम भारती, माले नेता सुनील राय ने रुपौली पंचायत के मनरेगा योजना में फर्जीवाड़े की जांच जिला के लोकपाल से कराने की मांग जिलापदाधिकारी से किया है।
इस संबंध में पूछे जाने पर मौजूदा पीओ कुमारी श्वेता ने जांच करने के बदले बताया कि हमसे पूर्व के पीओ के कार्यकाल में दो एस्टीमेट पर दो पुल का निर्माण कराया गया है।निर्माण प्राक्कलन के अनुरूप की गई है।
रुपौली स्थित पहल पुलिया जिसका निर्माण दो एस्टीमेट की राशि से की गई है।