खादी के आगे खाकी बेबस? पैसों के आगे बिकी कुर्सियां! महिला थाना कांड संख्या 182/25 में पॉक्सो की धाराएं बनीं मज़ाक, पीड़िता के आवेदन रद्दी में फेंके जाने का आरोप।
खादी के आगे खाकी बेबस? पैसों के आगे बिकी कुर्सियां! महिला थाना कांड संख्या 182/25 में पॉक्सो की धाराएं बनीं मज़ाक, पीड़िता के आवेदन रद्दी में फेंके जाने का आरोप।
खादी के आगे खाकी बेबस? पैसों के आगे बिकी कुर्सियां!महिला थाना कांड संख्या 182/25में पॉक्सो की धाराओ को पुलिस ने बनाया मजाक,कथित मौनी बाबा को न्यायालय से तत्काल राहत ,दोष मुक्त होना बांकी ?
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
महिला थाना में दर्ज पॉक्सो एक्ट कांड संख्या 182/25 को लेकर जिले की पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि भ्रष्ट सिस्टम के आगे न्याय ने दम तोड़ दिया। कहा जा रहा है कि “खादी के आगे खाकी झुक गई और पैसों के आगे कुर्सियां बिक गईं”, जिसका नतीजा यह हुआ कि सत्य पर असत्य की तात्कालिक विजय हो गई और कथित संत राम उदित दास उर्फ मौनी बाबा की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय ने निष्पादित कर दिया लेकिन दोष मुक्त नहीं हुये हे।पुलिस के सभी अधिकारियों ने इस मामले को मजाक बना दिया और एक बार फिर रसूख के आगे पुलिस झुकती दिखाई पड़ी।वजह पूरे जिलावासियों के सामने हे ,कितनी लापरवाही थाना पुलिस एवं अन्य अधिकारियों द्वारा बरती गई लेकिन कारवाई नदारद ?
पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि 3 दिसंबर को दिए गए आवेदन पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। 18 दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें भी कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया। परिजनों द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर को जब्त नहीं किया गया,किसी अन्य मोबाइल को जब्ती में दिखाया गया यही नहीं अनुसंधानक भी पुरुष पदाधिकारी को बनाया गया, बाद में अनुसंधानक को बदलने की बात कही गई ,जबकि मामला नाबालिग से जुड़ा था।
घटना स्थल निरीक्षण भी रात 10 बजे दो पुरुष और एक महिला पुलिस पदाधिकारी के साथ किया गया, जिस पर भी सवाल उठाए गये । आरोप है कि जिस दिन नाबालिग का कथित गर्भपात दवा देकर कराया गया, उस दिन संबंधित कथावाचक और मौनी बाबा का मोबाइल टावर लोकेशन एक ही पाया गया।
आवेदन पर नहीं हुई कार्रवाई, जांच भी नहीं बनी केस डायरी का हिस्सा
पीड़िता के परिजनों ने वरीय पुलिस अधीक्षक, डीएसपी तथा डीआईजी तक को कई आवेदन दिए। परिजनों का आरोप है कि एक भी आवेदन पर न तो विधिवत जांच हुई और न ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाया गया। आरोपों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिए जाने जैसा व्यवहार किया गया।पीड़ित पक्ष के वकील सुशील कुमार चौधरी कहते हे कि डीआईजी ने इस मामले की समीक्षा के बाद जो निर्देश दिये वह किसी मजाक से कम नहीं हे ?
पीड़िता के परिजनों ने आवेदन के साथ एसएसपी कार्यालय में आवेदन के साथ एक पेन ड्राईव दिया जिस पेन ड्राईव में मौनी बाबा का गंदा राज छुपा हे जिसे भी महिला थानाध्यक्ष ने केश डायरी में अंकित नहीं किया और न्यायालय में जमा नहीं किया और उक्त तिथि से पहले छुट्टी लेकर गायब हो गई। परिजन कहते हे कि बहुत जल्द उनके द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जाएगा और उस ऑडियो के राज को सार्वजनिक किया जाएगा।
परिजन कहते हे कि दरभंगा के एसएसपी से उन्हें न्याय की उम्मीद थी मगर उनके द्वारा भी ऐसे मामले में मौन व्रत रखा गया ,अगर एसएसपी ने निर्देश दिया भी, या तो उसका पालन नहीं हुआ या फिर उसे लागू नहीं कराया गया,जो अपने आप में हास्यास्पद हे और इतनी लापरवाही के बावजूद कोई कारवाई एसएसपी द्वारा थानाध्यक्ष या अन्य पर नहीं की गई।परिजन कहते हे कि पुलिस की इस लापरवाही को लेकर बहुत ही जल्द हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे ,ताकि किसी नाबालिग के साथ दुबारा ऐसा अन्याय नहीं हो ?