जय श्रीराम कथा में उमड़ा भक्तिरस, मिथिला आगमन प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

दस्तक 7 मीडिया, प्रशांत कुमार | कुशेश्वरस्थान

कुशेश्वरस्थान प्रखंड के केवटगामा पंचायत अंतर्गत पछियारी रही गांव में आयोजित जय श्रीराम कथा के तीसरे दिन पूरा गांव भक्तिरस में सराबोर नजर आया। कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और चारों ओर जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कथा के दौरान कथावाचक व्यास जी ने किशोरी जी के प्रादुर्भाव उत्सव का अत्यंत भावपूर्ण और मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता सीता के जन्मोत्सव के अवसर पर जनकपुरी सहित संपूर्ण मिथिला किस प्रकार आनंद और उल्लास से झूम उठी थी। चारों दिशाओं में मंगल गीत गूंज रहे थे और देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा से यह दिव्य प्रसंग और भी अलौकिक बन गया। इस प्रसंग को सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

इसके पश्चात कथा में प्रभु श्रीराम के मिथिला आगमन का सुंदर चित्रण किया गया। व्यास जी ने कहा कि जैसे ही प्रभु श्रीराम जनकपुरी पहुंचे, पूरा नगर हर्षोल्लास से भर उठा। प्रभु के दर्शन मात्र से जनकपुरीवासी स्वयं को धन्य मानने लगे। मिथिला की गलियों में उत्सव जैसा माहौल था, हर घर में स्वागत और मंगलाचार की तैयारियां चल रही थीं। प्रभु श्रीराम का सौम्य रूप, विनम्र स्वभाव और मर्यादित आचरण श्रद्धालुओं के मन को आकर्षित कर रहा था।

कथा के दौरान यज्ञ नारायण भगवान की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। व्यास जी ने कहा कि यज्ञ नारायण भगवान की कृपा से ही धार्मिक आयोजनों से गांव और समाज में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहती है। उन्होंने मंगल कामना करते हुए कहा कि यज्ञ नारायण भगवान की कृपा पछियारी रही गांव सहित पूरे क्षेत्र पर सदैव बनी रहे।

कथा के अंतिम प्रसंग में नारद मुनि और दक्ष प्रजापति से जुड़ी कथा का वर्णन किया गया। व्यास जी ने बताया कि अहंकारवश दक्ष प्रजापति द्वारा नारद मुनि का अपमान किए जाने पर नारद जी ने उन्हें श्राप दिया। इस प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया कि अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता और संयम से ही जीवन में कल्याण संभव है।

पूरी कथा के दौरान श्रद्धालु जय श्रीराम के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। गांव में आयोजित इस राम कथा से धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक समरसता और सद्भाव का संदेश भी प्रसारित हुआ।