शिव को गुरु मानने का संदेश लेकर गोलमा पहुँचा शिव गुरु महोत्सव, एक लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल

दस्तक 7 मीडिया, प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान।

प्रखंड के तिलकेश्वर पंचायत अन्तर्गत गोलमा गाँव में भव्य शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया गया।यह कार्यक्रम शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के द्वारा आयोजित किया गया l उक्त कार्यक्रम का आयोजन महेश्वर शिव के गुरु स्वरुप से एक एक व्यक्ति का शिष्य के रुप मे जुराव हो सके इसी बात को सुनाने और समझाने के निमित्त किया गया।

शिव शिष्य साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी के संदेश को लेकर आयी कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनन्द ने कहा कि शिव केवल नाम के नही अपितु काम के गुरु है। शिव के औढरदानी स्वरुप से धन, धान्य, संतान, सम्पदा आदी प्राप्त करने का व्यापक प्रचलन है तो उनके गुरु स्वरुप से ज्ञान भी क्यों नहीं प्राप्त किया जाय। किसी संपत्ति या संपदा का उपयोग ज्ञान के अभाव घातक हो सकता है।दीदी बरखा आनन्द ने कहा कि शिव जगतगुरू है अतएव जगत का एक एक एक व्यक्ति चाहे वह किसी धर्म, जाति, संप्रदाय, लिंग का शिव को अपना गुरु बना सकता है। शिव शिष्य होने के लिए किसी पारम्परिक औपचारिकता अथवा दीक्षा की आवश्यकता नही है lकेवल यह विचार कि शिव मेरे गुरु है शिव शिष्यता की स्वमेव शुरुआत करता है lइसी विचार का स्थायी होना हमको आपको शिव का शिष्य बनाता है।

आप सभी को ज्ञात है कि शिव शिष्य साहब हरीन्द्रानन्द जी ने सन 1974 में शिव को अपना गुरु माना 1980 के दशक तक आते आते शिव की शिष्यता की अवधारणा भारत भूखण्ड के विभिन्न स्थानों पर व्यापक तौर पर फैलती चली गई l शिव शिष्य साहब हरीन्द्रानन्द जी और उनकी धर्मपत्नी दीदी नीलम आनन्द जी के द्वारा, जाति, धर्म, लिंग, वर्ण, सम्प्रदाय आदी से परे मानव मात्र को भगवान शिव के गुरु स्वरुप से जुरने का आहवान किया गया l

यह अवधारणा पूर्णतः आध्यात्मिक है, जो भगवान शिव के गुरु स्वरुप से एक एक व्यक्ति के जुराब से सम्बंधित है l भैया अर्चित आनन्द ने कहा कि शिव एवं शिष्याऐ अपने सभी आयोजन शिव गुरु है और संसार का एक एक व्यक्ति उनका शिष्य हो सकता है इसी प्रयोजन से करते है lशिव गुरु है यह तथ्य बहुत पुराना है।भारत भूखण्ड के अधिकांश लोग इस बात को जानते है कि भगवान शिव गुरु है, आदीगुरू एवं जगतगुरू है। हमारे साधुओ, शास्त्रों और मनीषियों द्वारा महेश्वर शिव को आदीगुरू, परमगुरू आदी विभिन्न उपाधियों से विभूषित किया गया।

शिव का शिष्य होने में मात्र तीन सूत्र ही सहायक है

पहला सुत्र अपने गुरु शिव से मन ही मन यह कहे कि हे शिव, आप मेरे गुरु है, मै अपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया कर दिजिए।
दूसरा सूत्र सबको सुनाना और समझाना है कि शिव गुरु है ताकी दूसरे लोग भी शिव को अपना गुरु बनायें। तीसरा सूत्र अपने गुरु शिव को मन ही मन प्रणाम करना इच्छा हो तो नम: शिवाय मंत्र से प्रणाम किया जा सकता है।

इन तीन सूत्रों के अलावा किसी भी अंधविश्वास या आडम्बर का कोई स्थान बिलकुल नही है l इस आध्यात्मिक परिचर्चा में समीपवर्ती क्षेत्रों से एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए।इस कार्यक्रम में राँची से शिव कुमार विश्वकर्मा, सहरसा के परमेश्वर राय, दरभंगा के रमण प्रधान सहित कई अन्य वक्ताओ ने भी अपने अपने विचार दिए।