वायरल वीडियो के बाद एसएसपी ने बेता थानाध्यक्ष को किया निलंबित,वन-वे लागू कराने के दौरान हुआ विवाद, गाली-गलौज का वीडियो बना निलंबन की वजह ?
वायरल वीडियो के बाद एसएसपी ने बेता थानाध्यक्ष को किया निलंबित,वन-वे लागू कराने के दौरान हुआ विवाद, गाली-गलौज का वीडियो बना निलंबन की वजह ?
वायरल वीडियो के बाद एसएसपी ने बेता थानाध्यक्ष को किया निलंबित,वन-वे लागू कराने के दौरान हुआ विवाद, गाली-गलौज का वीडियो बना निलंबन की वजह ?
दस्तक 7मीडिया /दरभंगा
बेता थाना क्षेत्र में गाली-गलौज के एक वायरल वीडियो ने पुलिस प्रशासन को कठघरे में ला खड़ा किया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने बेता थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वायरल वीडियो में थानाध्यक्ष कथित तौर पर खुलेआम गाली देते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
हालांकि, पूरे मामले के पीछे की परिस्थितियां अब जांच का विषय बन गई हैं। जानकारी के अनुसार, घटना के समय थानाध्यक्ष हरेंद्र कुमार मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर एसएसपी के निर्देश पर वन-वे यातायात व्यवस्था को सख्ती से लागू करा रहे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मी सड़क पर तैनात थे और वाहनों को हाथ देकर रोक रहे थे।
एक तेज रफ्तार अर्टिगा वाहन नियमों की अनदेखी करते हुए उसी गति से आगे बढ़ गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हालात इतने गंभीर हो गए कि पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए सड़क किनारे कूदना पड़ा। अगर समय रहते ऐसा नहीं होता, तो बड़ा हादसा तय माना जा रहा था।
जाम के कारण आगे जाकर वाहन रुका। इसके बाद थानाध्यक्ष ने चालक को गाड़ी से उतरने को कहा, लेकिन आरोप है कि चालक ने उल्टे पुलिसकर्मियों से सीना जोरी शुरू कर दी। इसी तनावपूर्ण स्थिति में थानाध्यक्ष अपना आपा खो बैठे और गाली-गलौज कर बैठे, जिसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।
थानाध्यक्ष की गाली गलौज को लेकर उन्हें निलंबित कर दिया गया ताकि जनता का पुलिस पर भरोसा बना रहे। किन परिस्थितियों के कारण यह समस्या बनी यह जांच के दौरान स्टेशन डायरी से पता चल सकता हें आस पास के लोंगों से पूछने पर पता चलेगा लेकिन अगर चालक की गलती सामने आती है, तो संबंधित चालक और वाहन मालिक (यदि चिकित्सक हैं) पर क्या पुलिस प्राथमिकी दर्ज करेगी ?
वीडियो को लेकर भी सवाल
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि गाली-गलौज का वीडियो तो वायरल किया गया, लेकिन घटना की शुरुआत और पूरी परिस्थिति को दर्शाने वाला वीडियो सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? कानून के जानकारों का मानना है कि अगर तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर केवल आंशिक वीडियो प्रसारित किया गया है, तो यह भी जांच का विषय बनता है।
वन-वे उल्लंघन और जमीनी हकीकत
यह भी उल्लेखनीय है कि शहर में वन-वे नियमों का उल्लंघन आम बात हो गई है। इसमें कई बार प्रभावशाली लोग और चिकित्सक भी शामिल बताए जाते हैं। जब पुलिस नियमों का पालन कराने का प्रयास करती है, तो कई बार उन्हें विरोध और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जिससे जाम और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
इस पूरे मामले में यह साफ है कि केवल वायरल वीडियो के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम, स्टेशन डायरी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाना चाहिए। गलती चाहे थानाध्यक्ष की हो या चालक की ….कार्रवाई दोनों ही स्थिति में जरूरी है। तभी पुलिसिंग पर भरोसा कायम रह सकेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।सिर्फ थानेदार पर इस मामले में कारवाई करने से रसूखदारो का मन बढ़ेगा और स्थिति ऐसी हो जाएगी कि कोई पुलिस पदाधिकारी थानेदारी से कतराने लगेगा और बेहतर पुलिसिंग नहीं हो पाएगी ?
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