महिला थाना कांड संख्या 182/25 : अनुसंधान पर गंभीर सवाल, थानाध्यक्ष की भूमिका संदिग्ध ?

गिरफ्तारी के निर्देश के बावजूद NBW नहीं, कांड दैनिकी में अहम तथ्यों की अनदेखी, कांड देनिकी में मौनी बाबा के तीन पिता और दो आधार कार्ड  ,पूरे मामले ने उठाए कई गंभीर प्रश्न

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

दरभंगा महिला थाना में दर्ज कांड संख्या 182/25 (पॉक्सो एक्ट) के अनुसंधान को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित पक्ष के परिजनों का आरोप है कि इस संवेदनशील मामले में महिला थानाध्यक्ष की भूमिका न सिर्फ संदिग्ध है, बल्कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे अभियुक्त पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए अपने कर्तव्यों की अनदेखी कर रही हैं।

सबसे अहम बात यह है कि इस कांड की अनुसंधानकर्ता स्वयं महिला थानाध्यक्ष हैं, लेकिन अनुसंधान से जुड़ी बुनियादी प्रक्रियाओं का विवरण अब तक स्पष्ट नहीं किया गया है। परिजनों के अनुसार, थानाध्यक्ष ने कितने बजे अनुसंधान ग्रहण किया, साक्षियों के बयान कितने बजे दर्ज दर्ज किए गए ,घटनास्थल का निरीक्षण किस समय हुआ, पीड़िता की चिकित्सीय जांच कितने बजे कराई गई,पीड़िता का न्यायालय में बयान कितने बजे दर्ज कराया गया  ,इन तमाम तथ्यों का उल्लेख कांड दैनिकी में नहीं किया गया है,जो अनुसंधानकर्ता का घोर लापरवाही का द्योतक हें।

परिजनों का यह भी कहना है कि 2 जनवरी 2026 को ही न्यायालय में BNSS की धारा 183 के अंतर्गत बयान का अवलोकन हो चुका था, लेकिन इसे कांड दैनिकी में अंकित नहीं करना गंभीर लापरवाही है, जिससे भविष्य में विचारण के दौरान अभियुक्तों को न्यायिक लाभ मिलने की आशंका जताई जा रही है।

गिरफ्तारी का निर्देश, फिर भी मौनी बाबा फरार 

सूत्रों के अनुसार, 7 जनवरी 2026 को अनुसंधानकर्ता को पर्यवेक्षण टिप्पणी प्राप्त हुई थी, जिसमें दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी का स्पष्ट निर्देश दिया गया था,गिरफ्तार नहीं होने की स्थिति में कुर्की जब्ती की कारवाई का निर्देश हें। बावजूद इसके अब तक न्यायालय से NBW (गैर-जमानती वारंट) के लिए भी कोई माँग नहीं किया गया, जो अनुसंधान की मंशा पर सवाल खड़े करता है।हालाकि कथावाचक गिरफ्तार हो चुके हे मौनी बाबा पर यह कार्रवाई होनी हे ।

 मौनी बाबा के तीन पिता और दो आधार कार्ड,कैसे ?

मामले में नामजद अभियुक्त मौनी बाबा उर्फ राम उदित दास की पहचान को लेकर भी भारी विरोधाभास सामने आया है। अनुसंधान के दौरान अलग-अलग स्थानों पर पूछताछ में अभियुक्त के पिता के तीन अलग-अलग नाम सामने आए हें
इसमें पचाढ़ी मठ में लोगों ने बताया कि मौनी बाबा के पिता राम सेवक दास हैं।
बघोल आश्रम में पूछताछ में पिता का नाम रामचंद्र दास बताया गया।
वहीं पड़री गांव में जानकारी मिली कि मौनी बाबा उर्फ राम उदित दास उर्फ राम उदित ठाकुर के पिता स्वर्गीय अजब नारायण ठाकुर हैं।इस बात का खुलासा पीड़ित पक्ष के परिजनों ने किया हें।

इतना ही नहीं, सूत्रों का दावा है कि मौनी बाबा के पास दो अलग-अलग आधार कार्ड मौजूद हैं। यदि यह तथ्य सत्य है, तो यह सीधे-सीधे सरकारी दस्तावेज़ों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी का मामला बनता है, जिस पर अलग से प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए।

गवाह थाने में, थानाध्यक्ष नदारद

परिजनों का आरोप है कि गवाही के लिए गवाहों को थाने बुलाया गया। शुक्रवार को थानाध्यक्ष ने थाने पर आकर गवाही देने की बात कहीं थी और शुक्रवार को जब गवाह महिला थाना पहुंचे, तो थानाध्यक्ष मौके पर मौजूद नहीं थीं। सूत्र बताते हैं कि वे थाना छोड़कर कहीं और गई थीं और वह भी किसी आधिकारिक कार्य से नहीं। यदि ऐसा है, तो मोबाइल टावर लोकेशन से पता चल सकता हें।

वरीय अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतने गंभीर तथ्यों के सामने आने के बावजूद वरीय पुलिस पदाधिकारी मौन साधे हुए हैं। न तो अनुसंधान की समीक्षा की गई, न ही लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई दिखाई दे रही है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर जानबूझकर की गई चूक ताकि अभियुक्तों को न्यायिक प्रक्रिया में लाभ मिल सके?

महिला थाना पुलिस पर और भी आरोप 

महिला थाना पुलिस पर कई आरोप पुर्व में परिजनों द्वारा लगाए गये हें जिसमें तीन दिसंबर की चर्चा हें कि नाबालिग थाने में आवेदन देने गई जिस आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई ?20दिसंबर को दस बजे रात में दों पुरुष और एक महिला पुलिस पीड़ित के घर घटनास्थल देखने गई थी ,पॉक्सो एक्ट में इसकी इजाजत नहीं हें।

पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन महिला थाना कांड 182/25 में अब तक की कार्रवाई ने कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।