प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ता बच्चों का भविष्य: मध्य विद्यालय सुपौल में 10 वर्षों से ‘कब्जे’ में हैं क्लासरूम
प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ता बच्चों का भविष्य: मध्य विद्यालय सुपौल में 10 वर्षों से ‘कब्जे’ में हैं क्लासरूम
प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ता बच्चों का भविष्य: मध्य विद्यालय सुपौल में 10 वर्षों से ‘कब्जे’ में हैं क्लासरूम
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
बिहार के दरभंगा जिला अंतर्गत बिरौल प्रखंड के मध्य विद्यालय सुपौल बाजार से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक ओर सरकार ‘पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर गौड़ा बौराम प्रखंड सह अंचल कार्यालय ने इसी विद्यालय के दो कमरों पर पिछले 10 वर्षों से अवैध कब्जा जमा रखा है।
अधिकारियों की इस मनमानी का खामियाजा उन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो डर के साये में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों ने जो आपबीती सुनाई है, वह रोंगटे खड़े करने वाली है। बच्चों का कहना है कि अंचल कार्यालय के कब्जे वाले इन बंद कमरों से कभी-कभी विषैले सांप निकलते दिखाई देते हैं। अपनी जान बचाने के लिए बच्चे अक्सर कक्षा छोड़कर बाहर भागने को मजबूर हो जाते हैं। इसको लेकर अभिभावकों में भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि सरकारी कार्यालय चलाने के लिए बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक सिंधु सहनी ने बताया कि वे पिछले एक दशक से इस समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय अधिकारियों तक को लिखित सूचना दी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी स्तर से कई बार गौड़ा बौराम प्रखंड के बीडीओ को पत्र लिखकर कमरे खाली करने का आग्रह कर चुके हैं। वर्तमान बीडीओ मिहिर मयंक
ने माना कि भवन की कमी के कारण पूर्व के अधिकारियों ने विद्यालय भवन का उपयोग शुरू किया था, जो आज भी जारी है। बीडीओ श्री मयंक ने बताया कि वैसे भी अपना भवन नहीं होने से गौड़ा बौराम का प्रखंड कार्यालय वर्षों से बिरौल थाना क्षेत्र अंतर्गत उच्च विद्यालय के छात्रावास में संचालित हो रहा है। इस सभी समस्या का एक ही निदान है प्रखंड कार्यालय का अपना भवन होना।
अब सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकारी कार्यालय के उपयोग के लिए बच्चों की जान जोखिम में डालकर स्कूल परिसर में चलना चाहिए? क्या
दो कमरों के अभाव में क्या बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं हो रही है?
आखिर 10 सालों में प्रशासन अपने कार्यालय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं कर सका? “यह केवल दो कमरों का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों के मौलिक अधिकारों का हनन है। जब तक यह कमरे खाली नहीं होते, तब तक बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।”
दस्तक7मिडिया इस खबर के माध्यम से राज्य के शिक्षा मंत्री और जिलाधिकारी दरभंगा से यह पुरजोर मांग की जाती है कि इस मामले का अविलंब संज्ञान लें और विद्यालय परिसर को गौड़ा बौराम कार्यालय के उपयोग में हो रहे दो कमरे को मुक्त कराकर बच्चों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करें।