आंगनवाड़ी सेविकाओं को शीतलहर से बचाव का प्रशिक्षण

दस्तक 7मीडिया,गौड़ाबौड़ाम/दरभंगा 

दिनांक 12 जनवरी 2026 को ई-किसान भवन, घनश्यामपुर में आंगनवाड़ी सेविकाओं के लिए शीतलहर का प्रभाव, लक्षण, बचाव एवं प्राथमिक उपचार विषय पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप, यूनिसेफ और जीपीएसवीएस के तकनीकी सहयोग से संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण के मुख्य प्रशिक्षक जिला समन्वयक डॉ. श्याम कुमार सिंह ने बताया कि बिहार में शीतलहर के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में मौतें होती हैं, हालांकि इसका कोई पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। जाड़े के मौसम में वृद्ध और बीमार लोगों की अधिक मृत्यु इस बात का प्रमाण है कि शीतलहर स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालती है। इस दौरान श्वसन और हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। ठंड के कारण रक्त नलिकाएं सिकुड़ती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट अटैक का जोखिम भी बढ़ जाता है। बच्चों और वृद्धों में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा कोल्ड डायरिया, खांसी, बुखार और हाइपोथर्मिया की आशंका भी रहती है। कम पानी पीने से खून गाढ़ा हो जाता है और प्लेटलेट्स के आपस में चिपकने की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

डॉ. सिंह ने शीतलहर के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि शरीर का अत्यधिक ठंडा होना, अंगों का सुन्न पड़ना, तेज कंपकंपी, आग सेंकने के बाद भी शरीर में गर्माहट न लौटना, बार-बार जी मिचलाना या उल्टी, अर्द्धबेहोशी या मूर्छा आना प्रमुख लक्षण हैं। कभी-कभी त्वचा का रंग नीलापन या पीलापन भी ले सकता है। ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

बचाव के उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। बाहर जाना जरूरी हो तो पर्याप्त ऊनी और गर्म कपड़े पहनें। हाथ-पैर की उंगलियां, सिर, कान और चेहरा अच्छी तरह ढकें। गर्माहट के लिए अंगीठी, अलाव या हीटर का उपयोग करें, लेकिन बंद कमरे में कभी नहीं। सोने से पहले इन्हें बंद करना जरूरी है। गुनगुने पानी से स्नान करें और ठंडे पानी से बचें। पौष्टिक आहार और गर्म पेय पदार्थ—जैसे गर्म दूध, काढ़ा, सूप, चाय और कॉफी—का सेवन करें। विटामिन-सी युक्त फल (आंवला, संतरा, किन्नू) भरपूर लें। अदरक, काली मिर्च, तुलसी, दालचीनी और लौंग का काढ़ा लाभकारी है। खुले वातावरण में रहने वालों को मास्क पहनने की सलाह दी गई। साथ ही अंगीठी/अलाव से आग लगने की घटनाओं से बचाव के लिए सावधानी बरतने पर भी जोर दिया गया।

इस प्रशिक्षण सत्र में 68 आंगनवाड़ी सेविकाओं और 3 महिला पर्यवेक्षिकाओं ने भाग लिया।
दूसरे सत्र में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर चर्चा हुई और सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने पोषक क्षेत्रों को बाल विवाह मुक्त बनाने की शपथ ली।