प्राईवेट अंग में पेट्रोल डालने जैसा आरोप क्या गंभीर नहीं ,या फिर 70हजार रुपये की घूसखोरी कहाँ तक उचित ??बेहतर पुलिसिंग पर सवाल: ताजपुर कांड में समस्तीपुर एसपी की चुप्पी क्यों?”
प्राईवेट अंग में पेट्रोल डालने जैसा आरोप क्या गंभीर नहीं ,या फिर 70हजार रुपये की घूसखोरी कहाँ तक उचित ??बेहतर पुलिसिंग पर सवाल: ताजपुर कांड में समस्तीपुर एसपी की चुप्पी क्यों?”
प्राईवेट अंग में पेट्रोल डालने जैसा आरोप क्या गंभीर नहीं ,या फिर 70हजार रुपये की घूसखोरी कहाँ तक उचित ??बेहतर पुलिसिंग पर सवाल: ताजपुर कांड में समस्तीपुर एसपी की चुप्पी क्यों?”
दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय
बिहार में बदलती और बेहतर होती पुलिसिया कार्यशैली की जो तस्वीर सामने आ रही है, उस पर समस्तीपुर के ताजपुर थाना से जुड़ा यह मामला हथौड़ा मारकर ठंडे बस्ते में डाल देने जैसा प्रतीत हो रहा है। सवाल यह है कि क्या ऐसे गंभीर मामले की लीपापोती के लिए ही अब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, या फिर जांच की दिशा ही भटक गई है?
ताजपुर थाना क्षेत्र की यह घटना 28–29 की रात की बताई जा रही है। पीड़ित का बेहद गंभीर आरोप है कि चोरी के शक में पुलिस और दुकानदार ने मिलकर उसके प्राइवेट पार्ट में साइड से छेद कर पेट्रोल डाला। यह आरोप सिर्फ सनसनीखेज नहीं, बल्कि पुलिस पर लगे अब तक के सबसे गंभीर आरोपों में से एक है। बावजूद इसके, चार–पांच दिनों तक सोशल मीडिया पर आग की तरह फैलने के बाद भी समस्तीपुर पुलिस हरकत में नहीं आई।
करीब छह दिनों बाद जब यह खबर मीडिया तक पहुंची, तब समस्तीपुर के एसपी एक्शन मोड में नजर आए। जांच एएसपी को सौंपी गई और दावा किया गया कि “शाम तक पूरे मामले से पर्दा उठ जाएगा।” लेकिन दो–तीन दिन बीत जाने के बाद भी न तो ताजपुर थाना पुलिस पर कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने आई, न ही पीड़ित या पुलिस के बयानों को लेकर कोई ठोस निर्देश सार्वजनिक किया गया।
यही चुप्पी अब सवालों को जन्म दे रही है। अगर पीड़ित के साथ जांच के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ, तो यह बात प्रेस के माध्यम से या आम लोगों के सामने स्पष्ट क्यों नहीं की गई? और अगर थाना पुलिस की गलती है, तो एसपी स्तर से अब तक क्या कार्रवाई हुई ??इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
मामले में एक और गंभीर आरोप भी है कि ताजपुर थाना पुलिस ने 70 हजार रुपये लेकर एक अन्य कथित आरोपी दुकानकर्मी को छोड़ दिया, जिस पर भी दुकानदार को चोरी का शक था। खुद एसपी यह स्वीकार कर चुके हैं कि उसी दुकान में तीन साल पहले भी चोरी की घटना हो चुकी है जो विवादास्पद हे । ऐसे में सवाल और गहरे हो जाते हैं कि जांच किस दिशा में जा रही है।
यह मामला अब सिर्फ एक थाना या एक जिले का नहीं रह गया है। ताजपुर थानाध्यक्ष और वहां की पुलिस पर लगे दोनों आरोप बेहद गंभीर हैं। यदि इनमें जरा भी लापरवाही बरती गई, तो यह पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट आदेशों और “जीरो टॉलरेंस” की नीति का सीधा उल्लंघन माना जाएगा,खासकर तब, जब पुलिस के मुखिया खुद ऐसे मामलों में सख्ती की बात बार-बार कह चुके हैं।
समस्तीपुर के एसपी को चाहिए कि वे इस पूरे प्रकरण से पर्दा उठाएं ,चाहे सोशल मीडिया के जरिए ही सही। अगर खुलासा हो चुका है, तो वह सिर्फ फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि जनता के सामने आए। क्योंकि जब सवाल जनता के हैं, तो जवाब भी सार्वजनिक होने चाहिए।समस्तीपुर एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने यह भी कहा था कि आरोपी पक्ष के आवेदनों पर भी शख्त से सख्त कारवाई की जाएगी पर ऐसा लगता नहीं हे ?यहां बता दे कि मधुबनी जिला से पुलिसिंग कर आये ज्यादातर पुलिस पदाधिकारियों की कार्यशैली चर्चा में हे कि ठीक नहीं हे ?जिनकी पोस्टिंग दरभंगा /समस्तीपुर या अन्य जिलों में मधुबनी से पोस्टिंग हुई हे वे उसी स्टाईल में पुलिसिंग करने के लिये मजबूर हे लेकिन उस जिला के एसपी पर निर्भर हे कि उनसे किस तरह वे काम ले रहें हे ,या उनका प्रभाव कितना हे ?
प्राईवेट अंग में पेट्रोल डालने जैसा आरोप क्या गंभीर नहीं ,या फिर 70हजार रुपये की घूसखोरी कहाँ तक उचित ??बेहतर पुलिसिंग पर सवाल: ताजपुर कांड में समस्तीपुर एसपी की चुप्पी क्यों?”
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