दरभंगा /संजय कुमार राय

“”डायल 112″” इस शब्द से आप परिचित होंगे।इस योजना को चालू करने मे सरकार का मकसद बेहतर पुलिसिंग थी और सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट भी था ।सरकार का मकसद था कि अगर कोई भी पीड़ित व्यक्ति डायल 112 पर फोन करेगा तो पुलिस तुरंत उसके पास तक पहुंचेगी और न्यायसंगत कारवाई ऑन द स्पॉट करेगी

यही नहीं गंभीर मामलों मे संबंधित थानाध्यक्ष को सारी बातों से अवगत कराएगी,इसके बाद थानाध्यक्ष न्यायसंगत कारवाई करेगी। परंतु इन दिनों डायल 112 की गतिविधि बहूत हद तक बदली बदली सी दिखाई दें रही हैं।

इसमें कोई शक नहीं कि डायल 112 की व्यवस्था सरकार की अच्छी सोच थी और प्रत्येक जिला मे बेहतर काम भी कर रही थी। लेकिन इसमे तैनात पुलिस कर्मी भी बिहार पुलिस के कर्मी हैं इस कारण अब इनके काम करने के तरीके बदल गये हैं। विभिन्न थाना क्षेत्रों मे काम कर रहें डायल 112की टीम थाना क्षेत्र के इलाकों मे काम करते करते काफी अनुभव प्राप्त कर चुके हैं और  इस अनुभव को गलत दिशा मे इस्तेमाल करना शुरू कर दिये हैं।सूत्र बताते हैं कि कई शराब माफिया समेत अवैध रूप से काम कर रहें लोंगों से इनकी अच्छी पैठ हो चुकी हैं।ऐसे मे आप समझ सकते हैं कि इनकी कार्यशैली क्या हो सकती हैं।हालांकि सूत्र बता रहें हैं कि कहीं से जब इन्हें फोन आता हैं तो ये तुरंत पहुंच जाते हैं ,और कारवाई भी करते हैं।लेकिन कई मामलों मे कारवाई के बदले लेन देंन कर वहीं मामला निपटा देते हैं। इस तरह की शिकायत अब आम हो गई हैं। रात के अंधेरे मे डायल 112की गाड़िया अक्सर शहर के मुख्य चौक चौराहों पर पहले खड़ी दिखाई पड़ती थी लेकिन अब कई गाड़िया एन एच की शोभा बढ़ाती हैं। कहा जाता हैं कई ट्रक एवं गाड़ियों को रोककर भया दोहन भी किया जाता हैं।
कहा यह भी जाता हैं कि कि कई मुहल्ले ऐसे हैं जहॉ शराब की बिक्री धड़ल्ले से होती हैं मतलब होम डिलीवरी होती हैं ,उस मुहल्ले मे डायल 112की गाड़िया पहुंचती हैं और खड़ी हो जाती हैं। सूत्र बताते हैं कि ऐसे कारोबारी से पैसा वसूलकर चली जाती हैं। कई तरह के मामलों मे डायल 112की शिकायत लोग बताते रहते हैं।अब इस गाड़ी को देखिये, यह गाड़ी किसी शिकायत पर इस मुहल्ले मे नहीं आई हैं।सूत्र बताते हैं कि गाड़ी यहां खड़ी कर पुलिस अवैध उगाही के लिये आयी हैं।यह आरोप इस मुहल्ले के कई लोग लगा रहें हैं।

लेकिन यह भी सत्य हैं कि डायल 112के कार्यरत होने के कारण लोंगों का विश्वास पुलिस पर बढ़ गया था ,चुकी शिकायत मिलते ही घटनास्थल पर पहुंचना और कारवाई करना लोंगों का विश्वास बढ़ा रहा था लेकिन पैसे की उगाही के चक्कर इनका भी तरीका कुछ अलग दिशा मे मुड़ने लगा। यह भी सत्य हैं कि डायल 112के होने से थाना के संबंधित क्षेत्र मे बेहतर काम होने से थाने का भार भी कम गया था और संबंधित थानेदार को और भी काम करने का मौका मिल रहा हैं। ऐसे मे वरीय पुलिस पदाधिकारियों को इनपर नजर रखने की जरूरत हैं ताकि लोंगों का विश्वास बना रहें।

इस तरह की शिकायत बिहार के कई जिलों से आती रहती हैं।