ट्रांसफर–पोस्टिंग के नाम पर ‘खेला’? उत्पाद विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, कर्मचारी ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार
ट्रांसफर–पोस्टिंग के नाम पर ‘खेला’? उत्पाद विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, कर्मचारी ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार
ट्रांसफर–पोस्टिंग के नाम पर ‘खेला’? उत्पाद विभाग में भ्रष्टाचार के आरोप, महिला अधिकारी ने मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार
दस्तक 7मीडिया /पटना।
राज्य के उत्पाद विभाग में ट्रांसफर–पोस्टिंग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। विभाग के एक महिला अधिकारी ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि स्थानांतरण के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितता और भ्रष्टाचार हो रहा है। महिला अधिकारी का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से तबादले किए जा रहे हैं, जबकि कई अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं।
महिला अधिकारी ने भावुक अपील में कहा कि “यदि मेरी आवाज मुख्यमंत्री तक पहुँच रही है तो मुझे न्याय दीजिए। मेरे पास अब केवल दो ही रास्ते बचते हैं ….या तो नौकरी करूँ या फिर आत्महत्या जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर हो जाऊँ।”
हालांकि यह बयान व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है, लेकिन यह भी साफ करता है कि विभागीय हालात कर्मचारियों पर मानसिक दबाव बना रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री, जिनके पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है, से विशेष रूप से उत्पाद विभाग पर नजर रखने की मांग की गई है। महिला पदाधिकारी का कहना है कि यदि समय रहते पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो विभाग में भ्रष्टाचार और अधिक बेलगाम हो जाएगा।
महिला अधिकारी के सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाया विवाद
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब उत्पाद विभाग की एक महिला अधिकारी सोशल मीडिया पर यह कहते हुए दिखाई दीं कि उन्हें पटना जिला बल में पाँच महीने भी पूरे नहीं हुए थे, फिर भी उनका स्थानांतरण दूसरे जिले में कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर, विभाग में ऐसे कई अधिकारी और कर्मचारी बताए जा रहे हैं जो तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं, लेकिन उनका तबादला नहीं किया गया।
नियमों पर सवाल, प्रशासनिक पारदर्शिता की मांग
इस पूरे प्रकरण ने उत्पाद विभाग की ट्रांसफर नीति और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि स्थानांतरण नीति समान रूप से लागू की जाए और इसकी नियमित निगरानी हो, तो इस तरह के आरोप और असंतोष की स्थिति पैदा ही नहीं होगी।
अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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