शहर मे बिक रही भांग ,गांजा और नशीली दवाओं पर अगर रोक नहीं लगी तो यकीन मानिये आने वाली युवा पीढी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी ?इसकी रोकथाम बहूत ही जरूरी हैं ॥ऐसे नशीली पदार्थों की बिक्री मे जितना पुलिस की जवाबदेही हैं उससे ज्यादा जवाबदेही हम नागरिकों की भी हैं।आप जहां भी मादक पदार्थों की बिक्री देखते हैं तो स्थानीय पुलिस को जरूर फोन कर सूचना दीजिये।दरभंगा की अदालत ने एक सप्ताह पूर्व ही भांग बेचने के आरोप मे पांच वर्ष की सजा और अर्थदंड का फैसला सुनाया है।यहां बता दें कि

दरभंगा मे शराब की बिक्री हो ही रही हैं ,इसके अलावे भांग ,गांजा की बिक्री भी धड़ल्ले से की जा रही हैं।हालांकि पुलिस की नजर भांग और गांजा बेचने वालों पर नहीं हैं। शहर का कोई ऐसा चौक चौराहा नहीं जहां पान की गुमटियों मे यह कारोबार नहीं होता हो ,कुछ ही पान की दुकानें हैं जो साफ सुथरे तरीके से दुकानदारी कर रहें हैं।
इसमें लहेरियासराय बस स्टेंड मे लगी कुछ पान की गुमटी हैं वहीं लहेरियासराय रेलवे गुमटी के पार करते ही दो पान दूकानदार हैं ,वहीं रेलवे गुमटी से पहले मंदिर के बगल के दुकानों मे भांग ,गांजा की बिक्री हो रही हैं। बाघ मोड़ के दोनों रेलवे गुमटी के गुजरने के बाद  ही चाय और पान की दुकानों मे गांजा भांग खुले आम बेचे जा रहें हैं। हसन चौक से महाराजा किला ,आजमनगर मे कुछ पान दुकानदार इसे धड़ल्ले से बेच रहें हैं।
मजेदार बात यह हैं कि इसके सेवन करने वाले इन दिनों युवा वर्ग हैं। 13से 20 वर्ष के छात्र गांजा लेकर सिगरेट मे भरकर धड़ल्ले से सिगरेट पी रहें हैं। और जब इन्हें नशा चढ़ता हैं तो बेतर्किब मोटरसाइकिल चलाते हैं। यही नहीं कई लोगो को हल्का धक्का देते हुये भी भाग जाते हैं। कई मोटरसाइकिल तो ऐसे हैं जिसमें नंबर ही नहीं होता। मजेदार बात यह हैं कि जहां जहां भांग गाजे की बिक्री होती हैं वहां वहां ट्रेफिक पुलिस भी खड़ी रहती हैं लेकिन जाम की समस्याओं को निपटाने मे ही पुलिस का समय बीत जाता हैं। इस भांग ,गांजे की सेवन से युवा पीढी बर्बाद हो रहा हैं। ऐसे मे इन दुकानदारों पर लगाम लगाना आवश्यक हैं ?