नवादा दुखः शोक, जब आ पड़े, सौ धैर्य पूर्वक सब सहो। होगी सफलता क्यों नही, कर्तव्य पथ पर दृढ़ रहो। मैथिली शरण गुप्त की इन पंक्तियों से नवादा के जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने सीतामढ़ी मेला महोत्सव का उदघाटन किया। आज का दिन सीतामढ़ी के लिए ऐतिहासिक दिन साबित हुआ है, जहां पहली दफा बिहार के कला संस्कृति और युवा विभाग के जरिए सीतामढ़ी महोत्सव का आयोजन किया गया। जैसा कि सीतामढ़ी के बारे में मान्यता रही है कि सीता की निर्वासन स्थली रही है। निर्वासन के समय सीता अपने पुत्रों लव कुश के साथ सीतामढ़ी इलाका में वनवास का जीवन व्यतीत की थी। प्रत्येक साल अगहन पूर्णिमा के अवसर पर परंपरागत तरीके से सालों से सात दिवसीय मेला का आयोजन किया जाता रहा है।
हजारों लोग शामिल होते रहे। लेकिन मेला सरकारी उपेक्षा का शिकार था। यह कह सकते हैं कि सरकार की नजरों में सीता की निर्वासन स्थली भी वनवास की स्थिति में थी, जिसपर सरकार का कोई ध्यान नही था। लेकिन बिहार के कला संस्कृति और युवा विभाग ने सीतामढ़ी को 2025-26 के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल कर सरकारी वनवास को खत्म कर दिया है। बिहार में कुल 238 महोत्सव की सूची में सीतामढ़ी को शामिल किया गया है। इसके अलावा नवादा के तमसा और ककोलत को महोत्सव की सूची में शामिल किया गया है।
1906 में प्रकाशित (गजेटियर ऑफ बंगाल सर्वे एंड कंपाइलेशन 1850-1903) में बारत गांव में महर्षि बाल्मिकी के आश्रम का वर्णन है। महर्षि बाल्मिकी के आदेश पर भगवान विश्वकर्मा के जरिए पहाड़ी को काटकर गुफा बनाया गया था। जहां निर्वासन काल में सीता निवास करती थी। सीतामढ़ी गुफा चिकनी पॉलिसयुक्त है, जो जहानाबाद के बराबर गुफा के समान है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, यहीं लवकुश का जन्म हुआ था। सीतामढ़ी से एक मील उतर पूरब दिशा में बारत गांव हैं, जहां महर्षि बाल्मिकी रहते थे।
रामायण और पुराणों के मुताबिक, तमसा नदी के तट पर बाल्मिकी आश्रम था। जॉर्ज ग्रियर्शन द्वारा 1885 में लिखित द नोटस ऑन द डिस्ट्रिक्ट ऑफ गया में सीतामढ़ी में महर्षि बाल्मिकी की कुटिया होने का जिक्र है। सोनपुर जैसा दिलाया जाएगा अंतरराष्ट्रीय पहचान: रवि प्रकाश जिला पदाधिकारी रवि प्रकाश ने कहा कि जिस तरह से सोनपुर का हरिहर क्षेत्र मेला अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है, उसी प्रकार सीतामढ़ी की पहचान दूर दूर तक पहुंचे, जिला प्रशासन सतत प्रयास करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आनेवाले समय में यह मेला नवादा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेगा।
पहले भी हुए प्रयास, लेकिन रहे थे अधूरे नवादा के पहले जिलाधिकारी नरेंद्र पाल सिंह इस इलाका को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की पहल किया था। लेकिन तबादला के बाद कोई पहल नही हो सका। पूर्व जिलाधिकारी रामवृक्ष महतो के पहल पर सीतामढ़ी के रास्ते में एक गेट बनवाया था, जिसमें सीता के निर्वासन से जुड़ी कहानी का जिक्र था। हालांकि अब वह गेट भी अस्तित्व में नही है। यही नहीं, रामवृक्ष महतो एक विवाह मंडप का भी निर्माण कराए थे।
