“पत्रकार–पुलिस संबंध : सहयोग, सम्मान और लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी”,लेकिन पुलिस करती हें मनमानी।दरभंगा के एक पत्रकार के साथ पुलिस ने किया दुर्व्यवहार।
दस्तक 7मीडिया /
पत्रकार और पुलिस,दोनों ही समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम करती है, जबकि पत्रकारिता लोकतंत्र की आँख और आवाज़ मानी जाती है। ऐसे में दोनों के बीच संतुलित सहयोग और सम्मानपूर्ण व्यवहार बहुत ज़रूरी है।लेकिन राज्य के विभिन्न जिलों में ऐसा देखने को मिलता हें कि पत्रकारों के साथ पुलिस अच्छा व्यवहार नहीं करती हें ? हाल के दिनों में कई जगहों पर यह देखने को मिल रहा है कि पुलिस के मुताबिक़ नहीं चलने वाले पत्रकारों पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है, सवाल पूछने या खबर दिखाने पर दबाव बनाया जा रहा है। यह स्थिति चिंताजनक भी है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ भी?दरभंगा के पत्रकार सरफराज के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ ?अतिक्रमण के दौरान समाचार संकलन कर रहें पत्रकार सरफराज का वीडियो फुटेज पुलिस द्वारा जबरन डिलीट कराया गया और दुर्व्यवहार भी किया गया ?यही बात पुलिस प्रेम से कहकर भी कर सकती थी पर ऐसा नहीं हुआ ,जो चिंता जनक हें।ऐसा नहीं हें कि पुलिस को पत्रकार सहयोग नहीं करती हें ?अगर पत्रकार भी अपने पत्रकारिता धर्म पर अडिग हो जाय तों कई मामलों में पुलिस को औंधे मुंह गिरना पड़ेगा।
पत्रकारों के साथ पुलिस का व्यवहार कैसा होना चाहिए?
पुलिस को चाहिए कि वह पत्रकारों को उनके पेशे के प्रति सम्मान दे।खबर कवर करना पत्रकार का अधिकार है और पुलिस का कर्तव्य है कि वह इस प्रक्रिया में अनावश्यक बाधा न डाले।पत्रकारों को भी चाहिये कि सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जाए ताकि अफ़वाहें न फैलें और जन-विश्वास बना रहे।
प्रेस पर अनावश्यक दबाव, धमकी, अभद्र व्यवहार या FIR दर्ज करने जैसी कार्रवाई लोकतांत्रिक समाज के लिए खतरनाक संकेत है।किसी भी संवेदनशील मामले में पुलिस और पत्रकारों के बीच समन्वय बेहद ज़रूरी है।अधिकांश विवाद संवाद की कमी के कारण होते हैं।
ऐसा कब तक चलेगा?यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करना ही होगा, क्योंकि संविधान भी पत्रकारों को अभिव्यक्ति की आज़ादी देता है।