उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नया सवेरा: जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में स्नातकोत्तर कक्षाओं का दीक्षारंभ/प्रेरण कार्यक्रम संपन्न

दस्तक7मिडिया, बिरौल, दरभंगा।

कोसी, कमला और बलान के तराई क्षेत्र में स्थित, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा से संबद्ध जनता कोशी महाविद्यालय, बिरौल में स्नातकोत्तर कक्षाओं का ऐतिहासिक शुभारंभ हो गया है। उच्च शिक्षा की उपलब्धता की कमी से जूझ रहे इस भूभाग के लिए यह एक गौरव का क्षण है। स्नातकोत्तर के हिन्दी, इतिहास और समाजशास्त्र विषयों के प्रथम सत्र के विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ/प्रेरण कार्यक्रम-2025 का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रधानाचार्य (प्रभारी) और परीक्षा नियंत्रक सह विभागाध्यक्ष – मैथिली, डॉ. राजकुमार प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया। उन्होंने उपस्थित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें प्रेरित किया और कहा, “कठिन परिश्रम ही सफलता का एकमात्र मार्ग है। नियमित कक्षा में उपस्थित होकर मनसा–वाचा–कर्मणा अध्ययन करने से ही आप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राम शेख पंडित ने की, जिन्होंने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए उच्च शिक्षा में करियर निर्माण पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रकवि दिनकर की प्रेरक पंक्तियों से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। मंच संचालन हिन्दी विभाग के प्राध्यापक एवं NSS पदाधिकारी डॉ. शंभु पासवान ने किया, जिन्होंने छात्रों को निरंतर अध्ययन और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह दी।


मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष एवं महाविद्यालय कोषाध्यक्ष डॉ. भवेश कुमार ने अपने आशीर्वचन में विद्यार्थियों को लक्ष्य तक पहुंचने के लिए हमेशा मार्गदर्शन के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। उन्होंने महाविद्यालय में आधारभूत संरचना और विकास के लिए आर्थिक सहयोग की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी आश्वासन दिया।अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं कोऑर्डिनेटर, डॉ. बिन्दुनाथ झा ने इस नई शुरुआत को कोशी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि, “MA पाठ्यक्रम शुरू होने से युवाओं को अपने ही इलाके में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। सेमेस्टर प्रणाली में शिक्षक एक ‘फैसिलिटेटर’ है,अतः अब शिक्षा पूरी तरह छात्र-केंद्रित है।”समाजशास्त्र विभाग से डॉ. नरेश प्रसाद ने विद्यार्थियों से केवल ‘एडमिशन’ नहीं, बल्कि ‘पढ़ने’ आने का आह्वान किया। विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र डॉ. गोपाल सर ने विश्वविद्यालयी अध्ययन पद्धति और NTA-NET की तैयारी पर उपयोगी मार्गदर्शन दिया।

अन्य वक्ताओं ने भी छात्रों को प्रेरित किया। डॉ. अखिलेश ने सिलेबस, शोध कौशल और राष्ट्र के प्रति दायित्वों पर प्रेरक वक्तव्य दिया। महिला प्राध्यापकों — डॉ. चंदा, शारदा, डॉ. प्रियंका और डॉ.राधा ने स्नातकोत्तर अध्ययन की महत्ता, आत्मविश्वास और लक्ष्य निर्धारण पर छात्रों का मार्गदर्शन किया।उर्दू विभाग के डॉ.अबिद करीम ने सिलेबस, शोध अवसरों (Ph.D, M.Phil) और अपनी शैक्षणिक यात्रा साझा कर छात्रों का उत्साहवर्धन किया। संस्कृत विभाग के डॉ. शिव कुमार ने शिक्षण योजना और अध्ययन कौशल पर विचार प्रस्तुत किए। राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. दिलीप ने शिक्षकों को भी ‘सतत विद्यार्थी’ बताते हुए लड़कियों की शिक्षा, सामाजिक सोच में बदलाव और महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया।