2010 के बाद एनडीए को दोबारा दो सौ पार का बहुमत मिला है। लेकिन अररिया जिले में एनडीए को नुकसान हुआ है। पिछले विधानसभा चुनाव में चार सीटों पर कब्जा था। एक पर एआईएमआईएम और एक पर कांग्रेस जीती थी। लेकिन इस बार जहां पिछले 35 सालों से भाजपा जीत रही थी वहां भी कमल मुरझा गया।

फारबिसगंज में भाजपा की हार भले कम वोट से हुई है। लेकिन जनादेश एनडीए के खिलाफ है। जबकि लगातार यहां से दूसरी बार और कुल तीसरी बार भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह सांसद बने हैं। इसके बाद भी जिले के चार सीटों पर एनडीए की हार भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है। एनडीए के खिलाफ इस बार सिकटी विधानसभा सीट पर सबसे अधिक मत मिला।

जबकि अररिया सीट पर एनडीए को सबसे ज्यादा मत मिले। लेकिन अससुद्दी ओवैसी के उम्मीदवार को 55 हजार मत मिले, जो कांग्रेस के कैडर माने जा रहे हैं। बावजूद जेडीयू की हार हुई। इसके अलावा सिकटी, फारबिसगंज में पड़े मत की समीक्षा की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने फारबिसगंज हवाई अड्डा मैदान में छह नवंबर को चुनावी सभा की थी। लेकिन फारबिसगंज सीट भाजपा हार गई। जबकि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नरपतगंज और सिकटी के धर्मगंज सीट पर चुनावी सभाएं की थी, जहां भाजपा जीत गई है।

रानीगंज में दो विस चुनाव में जेडीयू जीता। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनावी जनसभा की तो जेडीयू यह सीट लूज कर गया। यहां तेजस्वी यादव ने सभा किया था तो राजद जीता। जोकीहाट में ओवैसी ने तीन जनसभा की और 28 हजार से उम्मीदवार न सिर्फ चुनाव जीते बल्कि तस्लीमुद्दीन का राजनीतिक तिलिस्म को भी ध्वस्त कर दिया।

स्थानीय भाजपा सांसद चुनाव से पहले से कहते रहे कि जिले में इस बार छक्का मारेंगे। कहने का अर्थ है कि सभी छह सीटों पर एनडीए की जीत होगी। लेकिन यहां जीते हुए सीट भी हार गया। भले कारण जो हो एंटी इन कम्बेंसी हो या ध्रुवीकरण हुआ हो। पिछले लोकसभा चुनाव में भी भाजपा की जीत बहुत अधिक मत से नहीं हुआ था। भाजपा के प्रदीप कुमार सिंह को 600146 मत तो राजद के शाहनवाज को 580052 मत मिले थे।