पति-पत्नी की ‘सियासी पारी’ का अनूठा तालमेल: गौड़ा बौराम सीट पर NDA की विरासत बरकरार।
पति-पत्नी की ‘सियासी पारी’ का अनूठा तालमेल: गौड़ा बौराम सीट पर NDA की विरासत बरकरार।
पति-पत्नी की ‘सियासी पारी’ का अनूठा तालमेल: गौड़ा बौराम सीट पर NDA की विरासत बरकरार।
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
बिहार की गौड़ा बौराम 79 विधानसभा सीट पर एक ऐसा अनूठा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है, जहां पति-पत्नी ने न सिर्फ विधायक की कुर्सी पर पदस्थापित होने की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन भाजपा के लिए इस महत्वपूर्ण सीट को लगातार बरकरार रखने में भी अहम भूमिका निभाई। यह सियासी दांव-पेच परिवार और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
इस कहानी की शुरुआत 2020 के विधानसभा चुनाव से होती है।
सुजीत कुमार, जो खुद एक सक्रिय अधिकारी थे, ने अपनी पत्नी स्वर्णा सिंह को गौड़ा बौराम सीट से मैदान में उतारा।
स्वर्णा सिंह ने तत्कालीन एनडीए सहयोगी दल विकासशील इंसान पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के उम्मीदवार अफजल अली खान को 7,280 वोटों के अंतर से पराजित किया। इस जीत के साथ, स्वर्णा सिंह न सिर्फ गौड़ा बौराम से विधायक बनीं, बल्कि उन्होंने अपने पति सुजीत कुमार के राजनीतिक विश्वास को भी मजबूत किया।
राजनीतिक घटनाक्रम ने फिर करवट ली। स्वर्णा सिंह के बीजेपी में शामिल होने के बाद, 2025 के विधानसभा चुनाव में यह सीट एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। इस बार, भारतीय जनता पार्टी ने स्वर्णा सिंह की जगह उनके पति सुजीत कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया।
ठीक उसी प्रकार, जैसे 2020 में सुजीत कुमार ने अपनी पत्नी को विधायक के पद पर पदस्थापित कराया था, अब विधायक स्वर्णा सिंह ने पार्टी के निर्णय का समर्थन करते हुए, अपने पति सुजीत कुमार को विधायक के पद पर पदस्थापित करने में सहायक बनीं। सुजीत कुमार ने गौड़ा बौराम विधानसभा सीट से जीत हासिल कर अपनी पत्नी की विरासत को आगे बढ़ाया, जिससे यह सीट लगातार एनडीए के खाते में बनी रही।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे गौड़ा बौराम विधानसभा सीट पर पति और पत्नी ने एक-दूसरे के लिए मार्ग प्रशस्त किया और पारिवारिक बंधन के साथ-साथ राजनीतिक तालमेल का एक दुर्लभ उदाहरण पेश किया, जो एनडीए की क्षेत्रीय ताकत को मजबूती प्रदान करता है। इससे पहले इस परिवार के मुखिया सुनील कुमार सिंह ने पंचायत की राजनीति से लेकर विधान परिषद सदस्य की भूमिका निभा कर स्वर्ग सिधार गए। उनके द्वारा किए गए सकारात्मक विकास कार्यों का चर्चा लोग आज भी करते हैं।