सीतामढ़ी क्षेत्र में पिछले चार दिनों से जारी भारी बारिश और बुधवार रात आए तेज तूफान ‘मौथा’ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस अचानक मौसम बदलाव से जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं खेतों में खड़ी धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। तेज हवाओं और जलभराव के कारण अधिकांश फसलें जमीन पर गिर गई हैं।

कई किसानों ने बताया कि उन्होंने अपनी पकी हुई फसल काटकर खेतों में रखी थी, जिसे वे सुखाकर घर लाने की तैयारी में थे। मूसलाधार बारिश और आंधी ने उनकी इस तैयारी को बाधित कर दिया। खेतों में रखे धान के बंडल पूरी तरह भीग गए हैं और पानी में डूब गए हैं, जिससे उनके सड़ने या अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है।

जिन किसानों की फसल अभी खड़ी थी, उनके लिए भी स्थिति खराब है क्योंकि पौधे गिर जाने से कटाई में कठिनाई आ रही है। स्थानीय किसान रामलाल निषाद ने बताया, “हमने पूरे साल मेहनत की थी, अब सब कुछ बारिश में बह गया। खेतों में इतना पानी भर गया है कि ट्रैक्टर तक नहीं जा पा रहे।

एक अन्य किसान सुनील पटेल ने कहा, “धान की कटाई शुरू ही हुई थी, लेकिन बारिश और तूफान ने सारा नुकसान कर दिया। अब लागत निकालना भी मुश्किल है।” कृषि विभाग के अनुसार, जनपद के कई गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है।

विभागीय टीमें खेतों का सर्वेक्षण कर रही हैं ताकि नुकसान का सही आकलन किया जा सके। लगातार हो रही वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यदि मौसम अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही रहा तो नुकसान और बढ़ सकता है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का शीघ्र सर्वेक्षण कर उन्हें मुआवजा दिलाया जाए। बारिश और तूफान के कारण खेतों में पानी भरने से ग्रामीणों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं और कई स्थानों पर आवागमन बाधित हुआ है।