भागलपुर में लोक आस्था के महापर्व छठ पर्व के समापन के साथ ही रेलवे स्टेशनों पर भीड़ बढ़ गई है। बिहार से रोजगार की तलाश में दिल्ली, मुंबई जाने वालों की भीड़ है। गुरुवार को आनंद विहार जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखी गई। दिल्ली, सूरत और मुंबई जाने वाले यात्रियों की लंबी कतारें लगी रही।

त्योहार में घर लौटे मजदूर अब एक-एक कर फिर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में लौटने लगे हैं। इस बार का पलायन राजनीतिक मायनों में भी अहम है। बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में भागलपुर में मतदान होना है, लेकिन उससे पहले ही हजारों की संख्या में लोग राज्य छोड़ रहे हैं।

स्टेशन पर नजारा ऐसा था, जैसे कोई विशेष ट्रेन चल रही हो। हर डिब्बे के बाहर लोगों की भीड़, हाथों में बैग, सिर पर झोला और बच्चों के साथ महिलाएं अपने गंतव्य की ओर निकलने को तैयार। रेलवे प्रशासन ने व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा बल की भारी तैनाती की है। सभी लोगों को कतारबद्ध तरीके से ट्रेन पर बैठा रहे थे।

अब तो त्योहार के समय घर आना होता है

मालदा मंडल के एडीआरएम शिवकुमार प्रसाद खुद मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि त्योहार के बाद हर साल यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए आरपीएफ और जीआरपी की टीमें लगाई गई हैं। लोगों को कतारबद्ध तरीके से ट्रेनों में चढ़ाया जा रहा है, ताकि कोई हादसा न हो।

वहीं, भीड़ के बीच बैठे सुनील यादव दिल्ली के आजादपुर मंडी में मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि त्योहार के समय घर आते हैं। मां-बाप को देखते हैं, लेकिन अब फिर जाना पड़ रहा है। बिहार में कोई काम नहीं है। जितनी मेहनत यहां करते हैं, उतनी कमाई नहीं होती। दिल्ली जाकर कुछ कमा पाते हैं।

मजबूरी में घर छोड़कर जाना पड़ रहा है

दूसरे फेज में भागलपुर में 11 नवंबर को वोटिंग है। इस सवाल पर सुनील ने कहा, ‘हमारे लिए वोट जितना महत्वपूर्ण है, उतना नौकरी भी है। इसलिए हमें प्रदेश लौटना जरूरी है। बिहार में अगर फैक्ट्रियां होती तो हम रोजगार यहीं करते और वोट भी देते। यहां हालात और भी दयनीय है।’

विक्रमशिला एक्सप्रेस से दिल्ली जा रहे दिलीप यादव ने बताया, ‘सरकार सिर्फ वोट मांगती है, लेकिन रोजगार नहीं देती। हर बार वादा करती है। फैक्ट्री खुलेगी, लेकिन कुछ नहीं होता। हमें मजबूरी में घर छोड़ना पड़ता है।’ यात्रियों के चेहरों पर अपने गांव और परिवार को छोड़ने की बेबसी साफ झलक रही थी। किसी ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा भेजना जरूरी है, तो कोई पत्नी के इलाज के लिए बाहर जा रहा था।