दरभंगा /संजय कुमार राय
दरभंगा पुलिस की बेहतर पुलिसिंग के कारण कई महीनों से शराब की बरामदगी पर विराम हैं। ऐसा लग रहा हैं कि जिले मे राम राज्य की स्थापना हो चुकी हैं। एक विश्वविद्यालय थाना को छोड़ कई थानों से इन दिनों शराब की बरामदगी नहीं हो रही हैं। इसे और क्या समझा जाय। राज्य सरकार को चाहिये कि यहां के तमाम पुलिस पदाधिकारियों को पुरस्कृत करें ?
वैसे हर गली मुहल्ले मे शराब की होम डिलीवरी खुले आम हो रही हैं। शहर का कोई ऐसा मुहल्ला नहीं हैं जहां शराब की बिक्री नहीं होता हो। शाम के आठ बजे के बाद शहर के कई सड़कों पर लोग झूमते नजर आ जाएंगे।
पुलिस का रोक टोक अभियान भी समाप्त हैं। वाहन चेकिंग भी अब नहीं होती हैं। शराब कारोबारी भी निश्चिंत हैं।
इसे अगर दूसरी भाषा मे समझने का प्रयास करें तो गली मुहल्लों मे शराब की बिक्री हो ही रही हैं यानि होम डिलीवरी जारी हैं। लोग शाम ढलते ही झूमने लगते हैं ?ऐसे मे यही सवाल हैं ,कि होम डिलीवरी या नशेबाज को शराब आखिर मिलती कहां से हैं। कोई ना कोई शराब कारोबारी हैं जो इन्हें शराब मुहैया कराता हैं। फिर ऐसे लोंगों की गिरफ्तारी क्यू नहीं हो रही हैं। शराब की बरामदगी क्यू नहीं हो रही हैं।शराब की बरामदगी सिर्फ विश्वविद्यालय थाना से क्यू हो रही हैं ,दूसरे थाना मे शराब की बरामदगी क्यू नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि इन शराब माफियाओ से पुलिस मासिक रकम या साप्ताहिक रकम तय कर चुप चाप बैठ गई हो।
अक्सर लोंगों के जुबान पर आजकल एक बात आ रही हैं कि इन दिनों पुलिस पांच दस साल का इंतजार करोड़पति बनने के लिये नहीं करती हैं उसे बस एक आध महीनों मे करोड़पति बनने की चेष्टा हैं।
कई ऐसे पुलिस कर्मी भी हैं जो एक आध साल मे करोड़पति बन भी गये हैं। कई डीएसपी रेंक के पदाधिकारी को तो चार साल नौकरी के हुये नहीं हैं करोड़ों रुपये की जमीन फ्लेट आदि खरीद चुके हैं। कई थानेदार भी इस श्रेणी मे हैं। और यह अवैध वसूली सिर्फ शराब और बालू खनन से हो रहें हैं। दरभंगा जिला मे बालू खनन नहीं हैं लेकिन मधुबनी जिले के बॉर्डर इलाके मे बालू खनन से कई पदाधिकारीयों को मोटी रकम मिलने की बात सामने आती रहती हैं। सूत्र बताते हैं कि दरभंगा जिला के कई थाना क्षेत्रों मे शराब की ट्रकें उतर रही हैं। रेलवे के गिट्टी लदे रैक से शराब आ रही हैं और ऐसे शराब माफियाओ से पुलिस को काफी मोटा रकम प्राप्त होता हैं। शराब के मामले मे कोई पत्रकार अगर खबरो के माध्यम से सूचना देने का प्रयास करता हैं तो जिला के वरीय पुलिस अधिकारी अपने स्तर पर जांच कराने के बजाय पत्रकारों से ही सबूत मांग देते हैं। पत्र के माध्यम से पत्रकारों को डराने की कोशिश करते हैं ताकि कोई भी पत्रकार पुलिस के विरुद्ध लिखने का हिम्मत नहीं कर सके। इसके बदले मे वरीय पुलिस अधिकारी अपने पुलिस अधिकारियों पर जांच कर कारवाई के बदले सौगात देते हैं” डटे रहो “हम हैं और मामले की लीपा पोती कर देते हैं।आप लीपापोती कीजिये ,आप वरीय पुलिस अधिकारी हैं ,आप कुछ भी कर सकते हैं ,बड़ा पद हैं और पद का दुरुपयोग भी आप कर सकते हैं।पत्रकारों पर खुद से भी और दूसरों से भी मुकदमा करा सकते हैं ,जेल भी भेज सकते हैं।यह आपके अधिकार क्षेत्र मे हैं।लेकिन याद रखिये ,मुख्यमंत्री का शराब बंदी योजना ड्रीम प्रोजेक्ट हैं और इसे मूर्त रूप देने से सामाजिक व्यवस्था बदल सकती हैं ,इसके लिये ईश्वर ने समाज सेवा करने का मौका आपको दिया हैं।
लेकिन हम भी पत्रकार हैं ,खबरों के माध्यम से सूचना देते रहेंगे आप हमारी खबरों को भ्रामक समझिये या तथ्यहीन मानिये ,हम सच्चाई से रूबरू कराते रहेंगे।
पुलिस की ऐसी कार्यशैली से आप खुद समझ सकते हैं कि वरीय पुलिस पदाधिकारियो की कार्यशैली क्या हो सकती हैं। अब जब पुलिस के आलाधिकारी ही शराब के मामले मे कनीय पदाधिकारियो के पीठ पर हाथ थपथपा दें तो स्वाभाविक हैं कि शराब की बरामदगी कहां से होगी??
और ऐसे शराब माफियाओं से मासिक रकम तो वसूली की जाती हैं लेकिन शराब पकड़ी नहीं जाती। कई पुलिस कर्मी तो दबे जुबान मे यह भी कहते हैं कितना बार पकड़े और कितना बार जेल भेजे ?ये लोग शराब बेचने के मामले मे आदि हो चुके हैं। ऐसा भी कहा जाता हैं कि नये शराब कारोबारी जो पैसे की चाहत मे यह कारोबार शुरू कर दिये और पुलिस को पैसा नहीं दिये तो सूचना प्राप्त कर ऐसे कारोंबारी को पकड़ लेते हैं। बाहर राज्य से कोई नया कारोबारी अगर शराब मंगाया तो पुराने कारोंबारी इस मामले की सूचना पुलिस को दें देते हैं और ट्रक पकड़ी जाती हैं। इस मामले मे भी स्थानीय पुलिस स्थिर हैं ज्यादातर गाड़िया मद्य निषेध विभाग पटना की टीम बड़े वाहनों को पकड़ती हैं।
ऐसा नहीं हैं कि शराब मामले मे वरीय पुलिस अधिकारी लेन देंन से वंचित हैं।तात्कालीन दो दो एसपी भी आरोपित हो चुके हैं यही नहीं उनके घर से भी पटना पुलिस की टीम नगदी भी बरामद की थी ,गया के तात्कालीन कप्तान पर भी यह आरोप लगे थे और उस कारवाई का दंश अबतक झेल रहें हैं जो कितना बवंडर हुआ और एक गलती को छुपाने के लिये और भी गलती करते चले गये।
खैर हम भी यही कहेंगे कि इन दिनों दरभंगा मे राम राज्य हैं और कई सप्ताह से विवि थाना को छोड़ कई थानों की पुलिस ने शराब की बरामदगी नहीं की हैं। मतलब तो यही हैं कि दरभंगा से शराब व्यवसाई रफू चक्कर हो गये वजह दरभंगा पुलिस की बेहतर कार्यशैली हैं।
