करप्शन और घटिया निर्माण ने एक और पुल को खोखला कर दिया। सिवान के भगवानपुर प्रखंड स्थित मलमलिया में 105 करोड़ की लागत से बने 4KM लंबे ओवरब्रिज में 25 गड्ढे और निकली हुई सरिया साफ देखी जा सकती है।

राष्ट्रीय राजमार्ग (NH -331) पर बने इस पुल का उद्घाटन PM नरेंद्र मोदी ने 20 फरवरी 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किया था,जबकि महाराजगंज MP जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने फीता काटकर इसे जनता को समर्पित किया था, लेकिन उद्घाटन के डेढ़ साल बाद ही पुल में जगह-जगह दरारें, गड्ढे और खुले सरिये देखने को मिल रहे हैं।

दरारों और गड्ढों के करण हो रहे एक्सीडेंट

स्थानीय लोगों का कहना है कि,पुल की हालत खराब हो चुकी है,जिसके चलते आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। हरिकिशोर राय बताते हैं कि,पुल पर बने गड्ढे लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। इसके चलते कई बार राहगीर घायल हो चुके हैं, कुछ मामले तो काफी गंभीर होने के चलते मरीजों को पटना तक रेफर करना पड़ा है ।

कैप्टन चंदेश्वर सिंह ने कहा कि “पुल पर सरिया और गड्ढे साफ दिख रहे हैं। एप्रोच रोड पूरी तरह टूट चुका है, जिससे पैदल यात्रियों को काफी दिक्कतें हो रही हैं।

स्थानीय निवासी रामकुमार यादव ने बताया कि, पुल से रोजाना दर्जनों बसें और ट्रक गुजरते हैं। अगर यह गिरा तो बड़ी अनहोनी होगी। सरकार को समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए।

AE बोले- पुल की स्थिति खराब

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NH -331 पर बने गड्ढे के बीच दिखता सरिया।
पुल का निर्माण गोरखपुर रेल मंडल, रेल मंत्रालय के अधीन हुआ है, जब इसके बारे में पथ निर्माण विभाग के AE आदित्य से पूछा गया। तो उन्होंने कहा कि पुल की स्थिति खराब है, लेकिन गोरखपुर रेल मंडल ने अब तक इसे हमारे विभाग को हैंडओवर नहीं किया है।

जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक हम कुछ नहीं कर सकते। इस बयान ने विभागीय लापरवाही को और उजागर कर दिया है। साथ ही विभाग ने भी बताया कि, पुल की स्तिथि खराब हो गई है।

अंडरपास होने के बाद क्यों बना ओवरब्रिज

ग्राउंंड रिपोर्ट के दौरान सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया कि, जब उसी रेलवे लाइन पर पहले से अंडरपास बना था और ट्रेनों की संख्या भी सीमित है, तो करोड़ों की लागत से ओवरब्रिज बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? यह सवाल सीधे तौर पर निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

गड्ढों के चलते लोगों को होती है आने जाने में दिक्कत।
सांसद बोले-पुल में कोई खराबी नहीं

इस पूरे मामले के बारे में जब MP जनार्दन सिंह सिग्रीवाल से भास्कर संवाददाता ने सवाल किया गया तो, वो बोले-बलिया में 200 करोड़ की लागत से पुल बनवाया है। आप लोग केवल नेगेटिव ही दिखता है। कभी उसको भी दिखाइए।

उन्होंने पुल में किसी तरह की खराबी से साफ इंकार कर दिया तथा संवाददाता पर ही आरोप लगा दिया कि, आप गलत बता रहे है और जैसे ही माइक हटा वैसे ही सांसद अपना आपा खो दिए और वहां मौजूद भीड़ के बीच ही संवाददाता से अभद्र व्यवहार करने लगे और धमकाने हुए तुम तड़ाक पर आ गए।

चुनाव के बाद सांसद बना लेते हैं दूरी

जनता का आरोप है कि, सांसद चुनाव जीतने के बाद क्षेत्र से दूरी बना लेते हैं और छपरा क्षेत्र में ही सक्रिय रहते हैं। उसको सिग्रीवाल ने खुद सही साबित कर दिया कि वे क्षेत्र में नहीं जाते हैं। तभी तो पुल के शुरू में हीं रोड धंसा हुआ है और सरिया दिख रहा है।

रोज आने-जाने वाले राहगीरों को तो दिख जा रहा है, लेकिन इसका क्रेडिट लेने वाले सांसद को नहीं। आपको बताते चलें, कि छपरा के कुछ प्रखंड व सीवान के कुछ प्रखंडो को मिलाकर महाराजगंज संसदीय क्षेत्र का गठन हुआ है। सांसद का यही रवैया है कि, बीते दिनों मलमलिया में हुए हत्या में सहानुभूति के लिए पहुंचे तो स्थानीय लोंगों का भारी गुस्सा झेलना पड़ा था।

दोषियों पर हो कार्रवाई

पुल में जिस तरह से दरारें और गड्ढे सामने आए हैं,उसने यह साफ है कि, निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ। उद्घाटन के वक्त सांसद ने सारा श्रेय खुद लिया था, चूंकि पुल का निर्माण केंद्र सरकार की और रेल मंत्रालय के द्वारा करवाया गया था। लेकिन अब पुल जर्जर होने पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि, अगर जल्द मरम्मत और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे और दोषियों को सजा दिलाने की मांग करेंगे।

हो सकता है बड़ा हादसा…

मलमलिया ओवरब्रिज की मौजूदा स्थिति न सिर्फ भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है, बल्कि यह सैकड़ों लोगों की जान के लिए खतरा भी बन चुकी है।105 करोड़ की लागत से बने इस पुल का डेढ़ साल में जर्जर हो जाना विकास की कथित गाथा पर बड़ा सवालिया निशान है।

अब जिम्मेदारी सरकार, रेल मंडल और जनप्रतिनिधियों की है कि, वे दोषियों पर कार्रवाई कर पुल की मरम्मत कराएं, वरना किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।