अयोध्या दीपोत्सव 2025 : 26 लाख दीयों की रोशनी में नहाई रामनगरी, बने दो विश्व रिकॉर्ड

“जहां कभी गोलियां चली थीं, आज वहां दीये जल रहे हैं” : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

दस्तक 7मीडिया /संजय कुमार राय 

भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या ने इस दीपोत्सव पर इतिहास रच दिया। 26,17,215 दीयों की स्वर्णिम रोशनी से जगमगाती रामनगरी ने न सिर्फ आस्था का अलौकिक दृश्य पेश किया, बल्कि एक साथ दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किए —
1.सबसे अधिक लोगों द्वारा एक साथ दीप घुमाने का रिकॉर्ड
2.सबसे बड़े तेल के दीयों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को दोनों रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र प्राप्त करते हुए कहा —

“अयोध्या अब विवाद की नहीं, उत्सव की नगरी बन चुकी है। जहां कभी गोलियां चली थीं, आज वहां करोड़ों दीप जल रहे हैं।”

विश्व को दिया एकता और विश्वास का संदेश

उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में आयोजित यह दीपोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, एकता और समरसता का वैश्विक संदेश बन गया।
शहर के घाटों, सड़कों और भवनों पर लाखों दीप ऐसे जगमगाए मानो धरती पर तारों की बारिश हो गई हो।

 रिकॉर्ड की सटीक निगरानी — हर दीप का डिजिटल लेखा-जोखा

राम की पैड़ी पर दीयों की सजी पंक्तियों की गिनती क्यूआर कोड आधारित तकनीक से हुई।
हर जोन में पर्यवेक्षक तैनात थे ताकि कोई भी बुझा दीप अंतिम गिनती में शामिल न हो।
जैसे ही सूर्य अस्त हुआ, पूरी अयोध्या सुनहरी आभा में नहा उठी — दृश्य मानो स्वर्ग उतर आया हो।

 “ये दीये 500 वर्षों के संघर्ष की जीत हैं” — योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने कहा 

“1990 में जहां रामभक्तों पर गोलियां चली थीं, आज वहीं दीप जल रहे हैं। ये दीये केवल रोशनी नहीं, बल्कि 500 साल के संघर्ष और विश्वास की विजय गाथा हैं।”

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा 

“जिन्होंने राम को मिथक कहा, उनकी राजनीति अब अंधेरे में है। जो बाबर की कब्र पर शीश झुकाते थे, उन्होंने राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में आने से इंकार किया।”

 “अयोध्या बनेगी विश्व की आध्यात्मिक राजधानी”

योगी ने कहा कि हर वर्ष अब 6 से 10 करोड़ श्रद्धालु अयोध्या आ रहे हैं।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप अयोध्या का विकास किया गया है। आज अयोध्या भारत की ही नहीं, विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनने की ओर अग्रसर है।”

 संघर्ष से उत्सव तक ,रामनगरी की गौरव गाथा

कभी ताले में बंद रहे रामलला आज भव्य मंदिर में विराजमान हैं।
नवम दीपोत्सव में पूरे प्रदेश में 1 करोड़ 51 लाख से अधिक दीए जलाए गए।
यह केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि संदेश है कि 

“आस्था को कभी कैद नहीं किया जा सकता, वह अंततः उजाला ही फैलाती है।”

 अयोध्या आज केवल रोशनी में नहीं नहाई — यह भारत की आत्मा का पुनर्जागरण है।