दरभंगा बाल सुधार गृह में किशोर की संदिग्ध मौत , हत्या या आत्महत्या? जांच में जुटा प्रशासन,पहले भी किशोर कर चुका हें आत्महत्या।
दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /
दरभंगा जिले के लहेरियासराय थाना क्षेत्र स्थित लोहिया चौक के बाल सुधार गृह में शनिवार की सुबह एक किशोर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। मृत किशोर का शव शौचालय में फंदे से लटका हुआ मिला। घटना के बाद सुधार गृह प्रशासन और जिला पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह मामला आत्महत्या का है या हत्या का।
घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारी, शुरू हुई जांच
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी कौशल कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ रेड्डी जलारेड्डी, सदर एसडीएम विकास कुमार, एसडीपीओ राजीव कुमार तथा लहेरियासराय थानाध्यक्ष अमित कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, सुधार गृह कर्मियों से पूछताछ की और आवश्यक साक्ष्य जब्त किए। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) भेजा गया।
कौन था मृत किशोर?
मृतक की पहचान भरत दास (17 वर्ष, पिता — सकल देव दास, निवासी पैरा गांव, थाना सिंहवाड़ा) के रूप में की गई है। भरत बीते करीब डेढ़ महीने से बाल सुधार गृह में रह रहा था। उसे 31 अगस्त 2025 को सिंघवाड़ा थाना क्षेत्र के मोहनपुर वार्ड संख्या 7 में हुई आगजनी और मोबाइल छिनतई के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था।
गांववालों के मुताबिक, उस रात करीब 10:30 बजे एक घर में आग लगा दी गई थी और मौके पर मौजूद व्यक्ति का मोबाइल छीन लिया गया था। घटना के बाद ग्रामीणों ने तीन किशोरों — सुशील दास उर्फ बिजली, रवि सदा और भरत दास — को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया था। जांच के बाद तीनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुधार गृह भेजा गया।
परिजनों ने उठाए गंभीर सवाल
भरत की मौत के बाद उसके परिजनों ने सुधार गृह प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतक की चाची अनीता देवी ने कहा,
“भरत को झूठा फंसाया गया था। उसने मोबाइल थाना में जमा करा दिया था, फिर भी उसे सुधार गृह भेज दिया गया। अब उसकी हत्या कर दी गई है। यह आत्महत्या नहीं हो सकती। हमें न्याय चाहिए।”
परिजनों का कहना है कि भरत की किसी से अनबन थी और उसी विवाद के कारण उसकी जान ली गई है। परिवार का रोष इस बात पर भी है कि पुलिस ने उन्हें समय पर सही जानकारी नहीं दी।
प्रशासन बोला — रिपोर्ट आने के बाद होगी सच्चाई स्पष्ट
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण की पुष्टि हो सकेगी।
वहीं एसएसपी जगन्नाथ रेड्डी जलारेड्डी ने कहा,
“घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है। प्रारंभिक जांच में बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।”
फिलहाल सुधार गृह के सभी कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों से पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि सुधार गृह में सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह से कार्यरत नहीं थे और निगरानी प्रणाली बेहद कमजोर है। अधिकारियों ने तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश
घटना की खबर फैलते ही परिजन और ग्रामीण डीएमसीएच पहुंच गए और न्याय की मांग करते हुए विरोध जताया।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसे “प्रशासनिक लापरवाही” बताते हुए कहा कि यदि सुधार गृहों में रह रहे किशोरों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, तो ऐसे संस्थानों का उद्देश्य ही विफल हो जाता है।
एफएसएल टीम जुटा रही साक्ष्य
पुलिस ने एफएसएल टीम को बुलाकर फंदे और घटनास्थल से मिली वस्तुओं को साक्ष्य के रूप में सील कर जांच के लिए भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
सुधार गृहों की व्यवस्था पर फिर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सुधार गृहों की सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की जवाबदेही और किशोरों के पुनर्वास प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि
“यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अपराध की पुष्टि होती है, तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
एक महिला के द्वारा उकसाने की हो रही चर्चा
बताया जा रहा हें कि जमानत को लेकर किशोर परेशान था लेकिन उससे मिलने आयी एक महिला ने किशोर को उल्टा पुल्टा कह दी,कहीं इस कारण किशोर ने फंदा तों नहीं लगाया।
