लवकुश आश्रम में आदिकवि की शिक्षाओं पर हुई चर्चा।
सीतामढ़ी में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर रामायण पाठ और भक्ति संध्या का आयोजन किया गया। महाकाव्य रामायण के रचयिता आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाई गई। यह आयोजन जिला प्रशासन के की देखरेख में लवकुश वाल्मीकि आश्रम मंदिर में हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसमें जिले के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा और बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु शामिल हुए। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है।
महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य का आदिकवि माना जाता है। उन्होंने मानव समाज को सत्य, धर्म और मर्यादा का संदेश दिया। उनके द्वारा रचित रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन के आदर्शों की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने समाज में समानता, सदाचार और करुणा का संदेश दिया, जो आज भी प्रासंगिक है।
लवकुश वाल्मीकि आश्रम परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की सजावट और भव्य रोशनी से वातावरण भक्तिमय बना हुआ था। महिला मंडल और युवा स्वयंसेवकों द्वारा भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया।
जिलाधिकारी ने बताया कि महर्षि वाल्मीकि जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि समाज में मानवता, समानता और ज्ञान के प्रसार का संदेश देने वाला अवसर भी है। उन्होंने लोगों से वाल्मीकि जी के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आग्रह किया।
पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के लिए पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई थी। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद वितरण और बैठने की समुचित व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई। इस अवसर पर नारेपार ग्राम प्रधान प्रतिनिधि धर्मेंद्र सिंह, ग्राम विकास अधिकारी संजय सिंह चौहान, लवकुश इंटर कॉलेज के प्रबंधक हौसला प्रसाद मिश्रा, चंद्रकांत शुक्ला, राजधर मिश्र और ज्ञानी मिश्र सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
