उपाधीक्षक ने कहा . चिकित्सक थे मौजूद, हथियार ले पहुंचे जख्मियों के परिजनों को देख छुप गए थे।

सदर अस्पताल में व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठाये जा रहे हैं। शुक्रवार की रात प्रतिमा विसर्जन के दौरान जख्मी हुए लोगों को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया, लेकिन अस्पताल की लापरवाही और चिकित्सकों की गैरमौजूदगी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर के गायब रहने से नाराज लोगों ने जमकर हंगामा किया।

 

करीब एक घंटे तक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में अफरातफरी का माहौल रहा। इस दौरान किसी ने अस्पताल की स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा कर दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से चिकित्सकों की गैरहाजिरी और अस्पताल की बदइंतजामी सामने आई। शहर के भवदेपुर गोट स्थित महावीर अखाड़ा के सदस्य नवीन कुमार समेत आधा दर्जन लोग शुक्रवार की रात प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान झगड़े में जख्मी हो गए थे।

 

स्थानीय लोग उन्हें तुरंत सदर अस्पताल लेकर पहुंचे ताकि उनका इलाज हो सके। लेकिन अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक मौजूद नहीं थे। इमरजेंसी वार्ड में सिर्फ स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारी मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, घायल करीब एक घंटे तक इमरजेंसी वार्ड में इलाज का इंतजार करते रहे। परिजन और साथी लगातार चिकित्सक को खोजते रहे, लेकिन कोई नहीं मिला। अंततः लोग नाराज होकर अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

 

इस दौरान मरीजों की गंभीर स्थिति देखकर भी चिकित्सक नहीं पहुंचे। हंगामे के बीच एक घायल नवीन कुमार का इलाज स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारियों ने मिलकर किया। लेकिन अन्य घायलों को परिवारजन इलाज के लिए निजी क्लिनिक ले गए। परिजनों का कहना था कि अगर सरकारी अस्पताल में चिकित्सक ही मौजूद नहीं रहेंगे तो गरीब और जरूरतमंद कहां जाएंगे। हंगामे के बाद स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जिम्मेदार चिकित्सक पर सख्त कार्रवाई की मांग कि है।

व्यवस्था पर बार-बार उठ रहा है सवाल यह घटना कोई नई नहीं है। सदर अस्पताल की व्यवस्था और चिकित्सकों की लापरवाही को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठे हैं। कई मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि अक्सर ड्यूटी समय पर डॉक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं रहते।

 

नतीजा यह होता है कि लोग मजबूरी में निजी क्लिनिक का रुख करते हैं और भारी भरकम खर्च उठाते हैं। भवदेपुर के निवासी रमेश कुमार ने कहा कि सरकारी अस्पताल में गरीब इलाज कराने आते हैं। लेकिन यहां तो डॉक्टर ड्यूटी से गायब रहते हैं। आज अगर किसी की जान चली जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता? वहीं घायल के परिजन ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि अस्पताल में तुरंत इलाज मिलेगा, लेकिन यहां तो भगवान भरोसे छोड़ दिया गया। इससे आक्रोश है।

 

चिकित्सक इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद थे, लेकिन हथियार लेकर लोगों की भीड़ इमरजेंसी में पहुंच हंगामा करने लगी। जिसे देख चिकित्सक अपनी जान बचाने के लिए छुप गए थे। – डॉ. मुकेश कुमार, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल सीतामढ़ी

वीडियो बना कर दिखाई लापरवाही आक्रोशित लोगों ने अस्पताल की पूरी व्यवस्था का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। वीडियो में इमरजेंसी वार्ड के ड्यूटी स्थल और डॉक्टर कक्ष में चिकित्सक नजर नहीं आये और यहां तक कि डीएस का कार्यालय भी ताला पड़ा नजर आया। वीडियो में लोग महिला नर्स से सवाल-जवाब करते नजर आए, जिसमें नर्स ने स्पष्ट कहा कि उस समय डॉ. एसपी झा की ड्यूटी थी। लोगों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ने घायलों की जान जोखिम में डाल दी। इसको लेकर लोगों में काफी नाराजगी थी।