एंटी रेबीज वैक्सीन दिलाने को लगी रही भीड़,

पशु शल्य अस्पताल लहेरियासराय में
दिन भर डटे रहे चिकित्सक,

प्रोजेक्टर पर दिखाई गई रेबीज से बचाव की फ़िल्म,

स्वास्थ्य परीक्षण के बाद दी निःशुल्क दवा व सलाह।

दस्तक 7मीडिया /दरभंगा

जब से दिल्ली एनसीआर के आवारा कुत्तों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सार्वजनिक किया है तब से खासकर श्वान पलकों में रेबीज के मामले में नई जागरूकता देखने को मिल रही है। यही कारण रहा कि 28 सितम्बर रविवार को विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पशु शल्य चिकित्सालय लहेरियासराय में आयोजित रेबीज रोधी टीकाकरण कैम्प में छोटे, मझौले व बड़े नस्ल के कई कुत्ते पहली बार देखने को मिला। कुत्ता पलकों ने एंटी रेबीज वैक्सीन दिलाने में इस बार पहले से अधिक दिलचस्पी दिखाई। टीकाकरण कैम्प का उद्घाटन करने के बाद जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ इंतेखाब अख्तर ने कहा कि रेबीज जनलेबा बीमारी है। टीकाकरण से ही इसका बचाव सम्भव है। रेबीज सिर्फ जानवरों के काटने से ही नहीं बल्कि उसके संक्रमित लार से भी फैलता है। उन्होंने सम्भावित खतरों के प्रति कुत्ता पालकों को जागरूक भी किया। वहीं, पशु शल्य चिकित्सक डॉ समरेंद्र बहादुर सिंह ने सुझाया कि अगर कुत्ता या अन्य संक्रमित पशु काट ले तो टीका ससमय अवश्य लें। इसके लिए उन्होंने बचाव का एक साधारण फार्मूला भी लोगों को बताया। डॉ सिंह ने कहा कि 0, 3 ,7, 14, 28 एवं 90 को याद रखें। यानी पीड़ित को कुत्ता काटने के दिन, फिर तीसरे दिन, सातवे दिन, 14वे दिन , 28वे दिन और फिर तीसरे महीने यानी 90वे दिन रेबीज रोधी टीका हर हाल में लेना चाहिए। इसके लिए उन्होंने नजदीकी अस्पताल से सम्पर्क करने की भी सलाह दी। बता दें कि पहली बार लहेरियासराय के पशु अस्पताल में पशु पालकों की इतनी बड़ी संख्या देखी गयी। इसी क्रम में करीब 107 कुत्तों एवं दर्जन भर बिल्लियों को निःशुल्क टीका लगाया गया और स्वास्थ्य परीक्षण के बाद सभी को दवा भी दी गयी। आज के कैम्प में पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा ‘अभी कार्यवाही करें : आप, हम , समुदाय ‘ विषय पर प्रोजेक्टर पर फ़िल्म भी चलती रही जिसका थीम रैबीज व उसके रोकथाम व दुष्प्रभाव के साथ बचाव के उपाय था । फ़िल्म का साफ सन्देश था कि रेबीज उन्मूलन में व्यक्तिगत के साथ साथ सामुदायिक भागीदारी जरूरी है। पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ जमरुद्दीन, डॉ गौतम, डॉ अशोक, डॉ साकेत मिश्रा तथा अस्पताल के अन्य कर्मियों के अलावा टीकाकर्मी सतीश कुमार ने टीकाकरण कैम्प को सफल बनाने में विशेष भूमिका निभाई।