दरभंगा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया 3463 करोड़ की 97 विकास योजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास, लाभुकों से संवाद।1951 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित शिलापट्ट को देख रुके मुख्यमंत्री

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /गुंजन कुमार 

मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान, दरभंगा में आयोजित कार्यक्रम स्थल से 3463.2 करोड़ रुपये की कुल 97 योजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास किया। इसमें 36 योजनाओं का उद्घाटन (कुल लागत 96.47 करोड़ रुपये) और 61 योजनाओं का शिलान्यास (कुल लागत 3366.73 करोड़ रुपये) किया गया। इन योजनाओं से जिले के विकास को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे आमजन को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान पेंशनधारी लाभुकों, जीविका दीदियों, आंगनबाड़ी सेविका/सहायिकाओं समेत अन्य लाभुकों से भी संवाद किया। लोगों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पेंशन राशि वृद्धि, आंगनबाड़ी सेविकाओं के मानदेय वृद्धि और किसानों तथा आशा कार्यकर्ताओं के लिए किए गए लाभों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सरकार हरसंभव सहयोग करती रहेगी।

कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने मिथिला संस्कृत स्नातकोत्तर अध्ययन एवं शोध संस्थान का भूमि-पूजन किया और संस्थान के प्रशासनिक भवन में पांडुलिपियों का अवलोकन किया। उन्होंने एनएच-77 से संस्थान को संपर्क देने हेतु प्रशासनिक मार्ग का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री  मंगल पांडेय, समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी, अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, प्रमंडल आयुक्त, पुलिस एवं जिला अधिकारी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की: “आप सभी मिल-जुलकर बिहार को आगे बढ़ाएं और अपने कार्यों में पूरी लगन बनाए रखें। सरकार हर संभव मदद करेगी।”

1951 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित शिलापट्ट को देख रुके मुख्यमंत्री

इसके अलावे  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शुक्रवार को मिथिला संस्कृत शोध संस्थान पहुंचे। यहां उन्होंने वर्ष 1951 में भारतीय गणराज्य के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा स्थापित शिलापट्ट को रुककर ध्यानपूर्वक देखा।

शिलापट्ट पर संस्कृत में अंकित तथ्यों से संस्थान के पूर्व पांडुलिपि विभागाध्यक्ष सह शास्त्रचूड़ामणि विद्वान डॉ. मित्रनाथ झा ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इसके बाद डॉ. झा ने पांडुलिपि भवन का भ्रमण कराते हुए मिथिलाक्षर, बंगलाक्षर और अन्य भाषाओं में उपलब्ध दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों के महत्व से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।