शिक्षा और खेल का संगम, केशव चौधरी बने प्रेरणा के प्रतीक बिरौल के शिक्षक ने शार्ट पुट में जीता स्वर्ण पदक, दिव्यांगजनों के लिए खोली नई राह
शिक्षा और खेल का संगम, केशव चौधरी बने प्रेरणा के प्रतीक बिरौल के शिक्षक ने शार्ट पुट में जीता स्वर्ण पदक, दिव्यांगजनों के लिए खोली नई राह
शिक्षा और खेल का संगम, केशव चौधरी बने प्रेरणा के प्रतीक बिरौल के शिक्षक ने शार्ट पुट में जीता स्वर्ण पदक, दिव्यांगजनों के लिए खोली नई राह
दस्तक7मिडिया, उत्तम सेनगुप्ता, दरभंगा।
शिक्षा और खेल, ये दो क्षेत्र अक्सर अलग-अलग माने जाते हैं। लेकिन, दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के डुमरी गांव निवासी व उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय प्रखंड मुख्यालय के शिक्षक केशव कुमार चौधरी ने इन दोनों क्षेत्रों में अद्भुत सफलता हासिल कर एक मिसाल कायम की है। हाल ही में, उन्होंने प्रमंडल स्तरीय दिव्यांगजन प्रतियोगिता-2025 में गोला फेंक (शार्ट पुट) स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर न सिर्फ दरभंगा, बल्कि पूरे बिहार का नाम रौशन किया है।
इस प्रतियोगिता का आयोजन नेहरू स्टेडियम, लहेरियासराय में हुआ था, जहां केशव चौधरी ने
7.46 मीटर गोला फेंक कर अपने शानदार प्रदर्शन से सबको चौंका दिया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें जिला खेल पदाधिकारी श्री परिमल और सहायक निदेशक, दिव्यांग सशक्तिकरण कोषांग श्री आशीष अमन ने मोमेंटो,मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि इसी महीने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानक डॉक्टरेट की उपाधि भी मिली थी। एक ही व्यक्ति द्वारा दो अलग-अलग क्षेत्रों में इस तरह की सफलता मिलना उनके बहुमुखी प्रतिभा और अटूट संकल्प को दर्शाता है।
पदक जीतने के बाद, शिक्षक केशव चौधरी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उनके परिवार, दोस्तों और हर उस शुभचिंतक की है, जिन्होंने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने दिव्यांगजनों को एक प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा कि “अपनी दिव्यांगता को कभी कमी न समझें, बल्कि इसे भगवान का दिया हुआ उपहार मानें।” उन्होंने यह जीत उन सभी माता-पिता को समर्पित की जो अपने दिव्यांग बच्चों का हर कदम पर साथ देते हैं।
जिला खेल पदाधिकारी श्री परिमल ने भी केशव चौधरी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे शिक्षा के साथ-साथ खेलों में भी सराहनीय भूमिका निभाते हैं और सरकारी खेल योजनाओं, जैसे ‘मशाल खेल’ में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
केशव चौधरी का अगला लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगजनों के लिए एक ऐसा मंच तैयार करना है, जहाँ उन्हें सभी प्रकार की खेल गतिविधियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल सके। उनकी इस जीत ने पूरे बिरौल अनुमंडल में खुशी की लहर दौड़ा दी है और हर कोई उनके भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएं दे रहा है।इस तरह से, केशव चौधरी की कहानी एक प्रेरणादायक संदेश देती है कि अगर मन में लगन और हौसला हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा और खेल, दोनों ही क्षेत्रों में सफलता की बुलंदियों को छुआ जा सकता है।