47साल पुराने वाद में दरभंगा कोर्ट का बड़ा फैसला :कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास मामले में राजेश्वर सिंह और कपलेश्वर सिंह होंगे ट्रस्टी।राज परिवार के सदस्यों को ही ट्रस्टी का अधिकार।

दस्तक 7मीडिया ,दरभंगा /विधि संवाददाता,

सिविल कोर्ट दरभंगा के अवर न्यायाधीश नवम् कुमार रितेश की अदालत ने कामेश्वर सिंह दरभंगा धार्मिक न्यास से सम्बंधित 47 वर्ष पुराने स्वत्व वाद में निर्णय सुनाई है। दरभंगा के राजकुमार स्वर्गीय सुभेश्वर सिंह के पुत्र राजेश्वर सिंह और कपलेश्वर सिंह ने महारानी अधिरानी काम सुन्दरी देवी एवं अन्य के खिलाफ हकीयत वाद संख्या 45/1978 दर्ज कराया। इस मामले में सब जज नवम कुमार रितेश की अदालत ने 47 वर्षों बाद निर्णय पारित किया है। उन्होंने अपने आदेश में अंकित किया है कि महारानी अधिरानी कामसुंदरी के मृत्यु पश्चात कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह देश के चर्चित और दरभंगा अवस्थित कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास के ट्रस्टी होंगे। दरभंगा राज परिवार के सदस्य और भविष्य में के ट्रस्टी होने को लेकर ट्रस्ट का निरीक्षण और लेखा प्राप्त करने के अधिकारी होंगे। वहीं महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी को निर्देशित किया गया है कि ट्रस्ट डीड में वर्णित तथ्यों के आलोक में वे अपना कर्तव्य निर्वहन करते रहेंगे। यदि भविष्य में राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह को लगे की कू- प्रबंधन हो रहा है तो वे इस अदालत में विविध वाद अर्पित कर राहत की मांग कर सकते हैं। अदालत ने महारानी अधिरानी काम सुन्दरी देवी को निर्देशित किया है कि मंदिर के पुजारी का भुगतान, राजभोग करने समय उत्सव आदि कार्य करवायेंगे। वहीं ट्रस्टी द्वारा मैनेजर को दी गई पावर ऑफ एटॉर्नी के आधार पर ट्रस्ट की भूमि और जेवरातों की बिक्री बिना कोर्ट के पूर्व अनुमति के नहीं करेंगे। यदि करते हैं तो अमान्य माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी आदेशित किया है की हकीयत बाद 45/ 1978 के लंबित रहने की अवधि में अगर ट्रस्टी द्वारा ट्रस्ट की कोई संपत्ति बेची गई है तो उसकी चुनौती वादी अदालत में दे सकते हैं। अदालत ने एस.बी.आई मेन ब्रांच दरभंगा के लॉकर में रखे जेबरातों को बिना न्यायालय की अनुमति लिए निकासी नहीं करने का आदेश ट्रस्टी को दिया है। वहीं कोर्ट ने एस. बी.आई मेन ब्रांच के मैनेजर को भी एतद संबंधी आदेश का अनुपालन करने के लिए निर्देशित किया है।
बतातें चले कि दरभंगा राज के राज कुमार स्व० शुभेश्वर सिंह के पुत्र राजेश्वर सिंह और कपलेश्वर सिंह ने कामेश्वर सिंह धार्मिक न्याय के ट्रस्टी महारानी अधिरानी कामसुन्दरी देवी को ट्रस्टी पद से अयोग्य घोषित करते हुए उन्हें पद से हटाने तथा उन्हें निदेशित करने कि ट्रस्टी वास्तविक आय- ब्यय खाता बही दिखाने और दोनों वादी को ट्रस्टी नियुक्त करने के लिए हकीयत वाद संख्या 45/1978 दर्ज कराया था। जिसमें सब जज नवम की अदालत ने इस 47 वर्ष पूर्व दर्ज मामलें में निर्णय पारित कर निष्पादित किया है।
महाराजाधिराज डाॅक्टर सर कामेश्वर सिंह ने इस रिलिजियस ट्रस्ट का निबंधित डीड का निबंधन 16 मार्च 1949 को किया था। दरभंगा, मुजफ्फरपुर में अवस्थित मंदिरों के अतिरिक्त भारत के बिभिन्न भागों में निर्मित राज टेंपल में नियमित रूप से पुजा, राजभोग, उत्सव, मरम्मति, रख – रखाव के उद्देश्य से इस ट्रस्ट की स्थापना किया था।